प्रयागराज 5 जनवरी (आरएनएस)। परिसरीय सभागार में आज केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गङ्गानाथ झा परिसर, प्रयागराज एवं प्रयाग विद्वत्परिषद् के संयुक्त तत्त्वावधान में पञ्च दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ परिसर के निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। कार्यशाला का शुभारम्भ मंगलाचरण एवं कार्यक्रम के मुख्यातिथि प्रो. आचार्य सत्यकाम, कुलपति, राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज, सारस्वताथि डा. वेंकट रामनाथन,समन्वयक, भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र, आई.आई.टी., बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति सुधीर नारायण के करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम के सारस्वतातिथि डा. वेंकट रामनाथन ने अपने वक्तव्य में भारतीय ज्ञान परम्परा में नवीन शोध कार्यों की अपार सम्भावनाओं को खोजने हेतु आयोजित की जाने वाली इस कार्यशाला को अतिमहत्वपूर्ण बताया। मुख्यातिथि प्रो. आचार्य सत्यकाम ने भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्धता से उपस्थित जनों का परिचय कराया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा को ऐसी गंगा के रूप में परिभाषित किया जिसमें विभिन्न ज्ञान रूपी नदियाँ समाहित हो रही हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे परिसर के निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने इस कार्यशाला को औपचारिक शोध के साथ साथ शोध की असीमित संभावनाओं को अन्वेषित करने का माध्यम बताया।
कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान हेतु न्यायमूर्ति सुधीर नारायण, भूतपूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद विश्वविद्यालय का विशेष अभिनन्दन किया गया। न्यायमूर्ति? (पूर्व) सुधीर नारायण ने भारतीय ज्ञान परम्परा के क्षेत्र विष्णु? सहस्रनाम के प्रत्येक श्लोक की चित्रमय प्रस्तुति का उल्लेख करते हुए उपस्थित विद्वतजनों के समक्ष अपनी पुस्तक हेतु किये गये प्रयोगों से परिचित कराया।
कार्यक्रम के अन्य संयोजक वरिष्ठ पत्रकार एवं समन्वयक, प्रयागराज विद्वत परिषद् पण्डित वीरेन्द्र पाठक ने महर्षि भरद्वाज के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित इस कार्यशाला को महर्षि भरद्वाज के विषय में विस्तार से जानने, समझने एवं अनुसरण करने का अद्वितीय अवसर बताया।
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