सुलतानपुर 6 जनवरी (आरएनएस। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर जिले में तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनावी माहौल बनते ही कई भावी प्रत्याशियों ने अपने नाम और फोटो वाली होर्डिंगें लगाकर मैदान में उतरने का दावा शुरू कर दिया है।हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। क्षेत्र में चर्चा है कि कई ऐसे भावी प्रत्याशी हैं, जिन्होंने न तो कभी गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से संवाद किया और न ही समाज के किसी मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बावजूद होर्डिंगों और प्रचार माध्यमों के सहारे खुद को मजबूत दावेदार बताने में लगे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ चुनिंदा लोगों से सीमित संवाद कर भावी प्रत्याशी होने का दावा करना जनता के बीच स्वीकार्य नहीं है। चुनाव के समय जब ये प्रत्याशी गरीबों और वंचितों के मसीहा बनकर सामने आते हैं, तब जनता उनके पूर्व कार्यों और सामाजिक योगदान को परखती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल प्रचार और होर्डिंगों के दम पर चुनावी सफलता हासिल करना आसान नहीं है। अंतत: जनता उन्हीं को समर्थन देती है, जो जमीन पर रहकर लोगों के सुख-दुख में सहभागी रहे हों। अब देखना यह होगा कि आगामी चुनाव में जनता दिखावटी प्रचार को तरजीह देती है या फिर जमीनी काम और जनसरोकार को अपना मापदंड बनाती है।
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