लखनऊ 6 जनवरी (आरएनएस )। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) नीति-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमावली-2025 को मंजूरी प्रदान की गई। इस नियमावली के लागू होने से प्रदेश में वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उच्च स्तरीय सेवाओं का विस्तार होगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावनाएं मजबूत होंगी। कैबिनेट द्वारा अनुमोदित नियमावली के अंतर्गत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह नियमावली जीसीसी नीति-2024 के प्रख्यापन की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी और राज्य सरकार द्वारा संशोधित अथवा समाप्त किए जाने तक लागू रहेगी।औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल लगातार बेहतर हुआ है, जिसके चलते देश-विदेश की बड़ी औद्योगिक इकाइयां और मल्टीनेशनल कंपनियां उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए संपर्क कर रही हैं। जीसीसी नीति प्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है और इसके अंतर्गत मानक संचालन प्रक्रिया को अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 21 कंपनियों ने जीसीसी के तहत निवेश शुरू कर दिया है, जिससे प्रदेश में व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।नियमावली के अनुसार, जीसीसी किसी भारतीय या विदेशी कंपनी द्वारा स्थापित की जाने वाली कैप्टिव इकाई होगी, जो सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, वित्त, मानव संसाधन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और नॉलेज सर्विसेज जैसे रणनीतिक एवं उच्च कौशल आधारित कार्यों का निष्पादन करेगी। इससे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल सर्विस डेस्टिनेशन के रूप में नई पहचान मिलेगी।जीसीसी इकाइयों को आकर्षित करने के लिए नियमावली में व्यापक वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इसके तहत फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट या प्रतिपूर्ति, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, संचालन व्यय सब्सिडी, पेरोल और भर्ती सब्सिडी, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, प्रतिभा विकास एवं कौशल प्रोत्साहन, अनुसंधान और नवाचार प्रोत्साहन के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार विशेष प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। इसके अलावा जीसीसी इकाइयों को तकनीकी सहायता, इंडस्ट्री लिंकेज सपोर्ट, विनियामक सहयोग, आवेदनों का त्वरित निस्तारण और अनुमोदन व प्रोत्साहन वितरण की सुव्यवस्थित व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी।नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसके अंतर्गत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन, केंद्र सरकार की किसी भी योजना या नीति के तहत मिलने वाले लाभों के अतिरिक्त होंगे। किसी भी प्रकार के विधिक विवाद की स्थिति में न्यायिक क्षेत्राधिकार केवल लखनऊ स्थित न्यायालयों का होगा। स्वीकृत प्रोत्साहन राशि का वितरण वित्त विभाग के प्रचलित नियमों और शासनादेशों के अनुसार किया जाएगा।योगी सरकार के इस निर्णय को उत्तर प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। जीसीसी नीति और नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में उच्च कौशल आधारित निवेश को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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