कानपुर नगर 6 जनवरी (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम के माध्यम से विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित गांव का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। यह अधिनियम ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, आधुनिक और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जिससे देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के तहत ग्रामीण श्रमिकों को मिलने वाली रोजगार की गारंटी को पहले की तुलना में 25 दिन बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जिससे गांवों में ही स्थायी रोजगार उपलब्ध होगा और पलायन की समस्या पर प्रभावी रोक लगेगी।मंगलवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर नगर में प्रेस प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों की गलियां ग्रामीणों के लिए हाईवे के समान हैं और अब इन गलियों को भी हाईवे की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। विकास के समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों का निर्धारण ए, बी और सी श्रेणी में किया जाएगा, ताकि हर गांव योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके। गांवों के विकास की बेहतर प्लानिंग के लिए पीएम गति शक्ति और जीआईएस जैसे आधुनिक आईटी टूल्स का उपयोग किया जाएगा। इस अधिनियम के अंतर्गत जॉब कार्ड अब तीन वर्षों के लिए बनाए जाएंगे, जिससे श्रमिकों को बार-बार प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस अधिनियम से न केवल गांवों का आधारभूत ढांचा मजबूत और सुदृढ़ होगा, बल्कि श्रमिकों को काम के साथ सम्मान और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण में यह अधिनियम अत्यंत प्रभावी सिद्ध होगा और देश के संसाधनों पर डकैती डालने वालों के मंसूबों पर विराम लगेगा। पहले मजदूर और ग्रामीण आजीविका के लिए पलायन को मजबूर थे, लेकिन अब उन्हें अपने गांव में ही स्थायी रोजगार मिलेगा। श्रमिकों और किसानों के हित में उठाए गए इस कदम का देशभर में सकारात्मक स्वागत हो रहा है।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम ग्रामीण विकास की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। इसके अंतर्गत अब किसी भी एनजीओ को कार्य नहीं सौंपा जाएगा और सभी योजनाएं पारदर्शी व्यवस्था के तहत संचालित होंगी। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए भी इस अधिनियम में विशेष प्रावधान किए गए हैं। मनरेगा में पहले से कार्यरत कर्मचारियों को इस अधिनियम के तहत हटाया नहीं जाएगा, बल्कि उनके अनुभव का लाभ लिया जाएगा। श्रमिकों के पारिश्रमिक के साप्ताहिक भुगतान की व्यवस्था भी की गई है, जिससे उन्हें समय पर मेहनताना मिल सके।उन्होंने यह भी कहा कि पहले स्कूलों में केवल बाउंड्री वॉल निर्माण की अनुमति थी, लेकिन अब किचन शेड और प्रयोगशालाओं के निर्माण को भी अनुमन्य किया गया है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली, जीआईएस आधारित मोबाइल एप और फेस रीडिंग जैसी डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी और दूरगामी प्रभाव वाला कदम है, जो गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
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