लखनऊ 7 जनवरी (आरएनएस )। राज्यसभा में उप नेता प्रतिपक्ष और सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर को लेकर जो आशंका पहले ही जताई थी, वह अब पूरी तरह सच साबित हो गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार यह चेतावनी देते रहे हैं कि एसआईआर के नाम पर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है और मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। आज जो आंकड़े सामने आए हैं, वे इस भाजपा षड्यंत्र की पुष्टि करते हैं।प्रमोद तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुल 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, जो लगभग तीन करोड़ के बराबर है। उन्होंने बताया कि इनमें से करीब 18 से 19 प्रतिशत वोट कटे हैं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 2 करोड़ 17 लाख मतदाता ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें अनुपस्थित या लापता दर्शा दिया गया। ये वही लोग हैं जो नौकरीपेशा हैं, मजदूर वर्ग से आते हैं, पिछड़े, दलित, गरीब और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े हैं या फिर फेरी लगाकर रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे शहरों और राज्यों में गए हुए थे और समय से फार्म नहीं भर सके।उन्होंने कहा कि एसआईआर से पहले उत्तर प्रदेश में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार मतदाता दर्ज थे। इनमें से 46 लाख 23 हजार को मृतक बताया गया और 25 लाख 47 हजार मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर होने का हवाला दिया गया। एसआईआर की प्रक्रिया के बाद प्रदेश में केवल 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाता ही शेष रह गए। प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह आंकड़ा अपने आप में लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश के कई राज्यों की कुल आबादी तीन करोड़ नहीं है और दुनिया के 40 से 50 ऐसे देश हैं, जिनकी जनसंख्या भी तीन करोड़ से कम है, लेकिन उत्तर प्रदेश में लगभग तीन करोड़ मतदाताओं के नाम एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से काट दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर वोट क्यों काटे गए। क्या सिर्फ इसलिए कि लोग समय पर फार्म नहीं भर सके या घर पर मौजूद नहीं थे। क्या यह लोकतंत्र का तरीका है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट सुझाव था कि एसआईआर की प्रक्रिया एक-दो महीने के बजाय एक से दो साल तक चलनी चाहिए थी, ताकि जो लोग रोजी-रोटी के लिए बाहर गए हैं, वे वापस आकर फार्म भर सकें। आमतौर पर प्रवासी मजदूर और कर्मचारी साल में एक-दो बार ही घर लौटते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त समय दिए बिना जल्दबाजी में पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इसका नतीजा यह हुआ कि उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर के लिए अत्यधिक दबाव और कम समय के कारण मानसिक तनाव में कई बीएलओ की मौत तक हो गई।प्रमोद तिवारी ने कहा कि एसआईआर के नाम पर जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उनके साथ विश्वासघात और छल किया गया है। उनसे संविधान द्वारा दिया गया मताधिकार छीन लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी कीमत भारतीय जनता पार्टी को चुकानी पड़ेगी। मतदाताओं का श्राप भाजपा को लगेगा और उत्तर प्रदेश से भाजपा का पूरी तरह सफाया होना तय है।उन्होंने कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिए अनगिनत लोगों ने कुर्बानी दी, अपने प्राण न्यौछावर किए, तब जाकर भारत स्वतंत्र हुआ। भाजपा और उसके संगठनों को शायद यह इतिहास पसंद नहीं है और न ही वे इसे समझते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के संघर्ष के समय भाजपा से जुड़े संगठन अंग्रेजों की सेना में भर्ती होने की अपील कर रहे थे और स्वतंत्रता आंदोलन के खिलाफ खड़े थे।प्रमोद तिवारी ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में जब बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश का संविधान बनाया, तो उसकी प्रतियां पुणे, मुंबई समेत देश के कई स्थानों पर भाजपा और उसके संगठनों द्वारा जलाई गई थीं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का सबसे सुंदर और मजबूत अधिकार यह है कि राजा का भी एक वोट होता है और गरीब का भी एक वोट। यही समानता भारतीय जनता पार्टी को कभी स्वीकार नहीं हुई और आज उसी अधिकार पर सबसे बड़ा हमला किया गया है।
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