-तीन चरण पूरे, चौथा चरण शुरू, अप्रैल 2026 तक होगा चालू
– बाघ, तेंदुए सहित घायल वन्यजीवों का होगा उपचार और पुनर्वास
मेरठ 7 जनवरी (आरएनएस)। 2073 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले अभयारण्य क्षेत्र से रेस्क्यू कर लाए जाने वाले वन्य जीवों को रखने के लिए मेरठ के हस्तिनापुर में रेस्क्यू एंड रिहेबिलिटेशन वन्य जीव सेंटर बनाया जा रहा है। हस्तिनापुर के वानिकी प्रशिक्षण केंद्र के समीप 4.74 करोड़ की लागत से नौ एकड़ में बन रहे रेस्क्यू सेंटर के तीन चरण पूरे हो चुके हैं।
एक जनवरी से चौथा चरण शुरू कर दिया गया है। यहां जंगली मेहमान बाघ, तेंदुए, भालू से लेकर चीतल और नीलगाय जैसे जीवों के लिए उपचार से लेकर पुर्नवास तक की व्यवस्था की जा रही है। इनके लिए विशाल बाड़े बनाए गए हैं। संगरोध केंद्र (क्वारंटाइन सेंटर) में संक्रमित वन्य जीवों की देखभाल होगी तो अत्याधुनिक उपचार कक्ष में उपचार। यह रेस्क्यू सेंटर पश्चिम उत्तर प्रदेश के वन्यजीवों की रक्षा का गढ़ बनेगा।
वाच टावर से लेकर प्रशिक्षण हाल तक आधुनिक
इस रेस्क्यू सेंटर में आधुनिक सुविधा युक्त आवास, उपचार केंद्र, क्वारंटाइन केंद्र, वाच टावर, प्रशिक्षण हाल, गार्ड रूम, पोस्टमार्टम हाउस, शवदाह केंद्र, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज टैंक, उद्यान कार्य, सोलर सिस्टम, पानी की टंकी, 28 बाड़े आदि काम यहां पर होने हैं। जिनमें से पोस्टमार्टम हाउस, स्ट्रीट लाइटें, सीवरेज टैंक, क्वारंटाइन केंद्र, स्टाफ रूम, उद्यान कार्य, 21 बाड़े, सड़कें बन चुकी हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने किया था शिलांयास
10 जून 2022 को इस रेस्क्यू सेंटर का शिलांयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। उस समय उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस तरह के पीलीभीत, महाराजगंज, चित्रकूट और मेरठ में चार रेस्क्यू सेंटर बनाए जा रहे हैं। इससे घातक वन्य जीव तेंदुए आदि को रेस्क्यू करके यहां रखा जा सकेगा। जिससे जनता की सुरक्षा होगी। रेस्क्यू सेंटर में बाघ, तेंदुआ, चीतल, हिरण, बारहसिंघा, खरगोश, नीलगाय आदि जानवरों को रखने के लिए 21 बाड़े बन चुके हैं। हालांकि यहां पर अभी स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है। यहां पर डिप्टी रेंजर, पशु चिकित्सक समेत अन्य स्टाफ तैनात रहेगा।
इन परिस्थिति में वन्य जीवों को रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा
वन्यजीवों को रेस्क्यू सेंटर में तब रखा जाता है जब वह घायल, बीमार, अनाथ या विस्थापित हो जाते हैं। ताकि उन्हें चिकित्सा उपचार, अस्थायी आवास और विशेष देखभाल प्रदान की जा सके। यहां उन्हें उपचार देकर पूरी तरह से फिट करके वापस उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
हस्तिनापुर का वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर में चार चरण में काम होना था, तीन चरण पूरे हो चुके हैं। चौथा चरण का भी 35 प्रतिशत काम पूरा हो गया। कुछ निर्माण बचे हैं, जिन्हें अप्रैल 2026 तक पूरा करके सेंटर को शुरू कर दिया जाएगा।
– वंदना फोगाट, प्रभागीय निदेशक वानिकी
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