मेरठ 7 जनवरी (आरएनएस)। बिजली उपकरणों की जांच के लिए गंगानगर में हाई टैक लैब प्रदेश की सबसे पहले संचालित होने वाली प्रयोगशाला बन गई है। प्रदेश के सभी पांच वितरण निगमों में इस तरह की प्रयोग शाला का निर्माण हो रहा है। ऊर्जा भवन में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रदेश के पांचों वितरण निगमों से 50 अभियंता भाग ले रहे हैं।
सोमवार को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने शिविर का शुभारंभ किया। महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी निगमों में स्थापित होने वाली प्रयोगशाला के लिए जांच उपकरणों की व्यवस्था पविविनिलि द्वारा की जा रही है। इसकी लागत 22.48 करोड़ रुपये है।
लगभग 26 प्रकार के विद्युत उपकरणों की परीक्षण सुविधा इस हाईटेक लैब में उपलब्ध कराई जायेगी। पावर ट्रांसफार्मर, कंडक्टर, केबिल, स्मार्ट मीटर, सीटी/पीटी, ब्रेकर, रिले अन्य महत्वपूर्ण विद्युत उपकरणों की जांच इसमें हो सकेगी। मेरठ में लैब बनकर तैयार है लगभग सभी उपकरण आ गए हैं। इस माह के अंत लैब का संचालन आरंभ हो जाएगा। वहीं अन्य चार वितरण निगमों में भी लैब निर्माण का कार्य चल रहा है। एमडी रवीश गुप्ता ने प्रतिभागी अभियंताओं से प्रशिक्षण की बारीकियों एवं तकनीकी दक्षता अपने अधीनस्थों से भी साझा करने का आह्वान किया।
जेके अरोडा, कैलाश जिंदल, एसएम सिस्टम के निदेशक संजय मिश्रा, डोबल इंजीनयरिंग के राहुल इस्लाम और साद ने टेस्टिंग उपकरणों के संबंध में विस्तार से बताया। संचालन अधीक्षण अभियंता हरिकेश,उमेश सोनकर और अधिशासी अभियंता आशुतोष शुक्ला ने किया। निदेशक संजय जैन, एनके मिश्र, स्वतंत्र कुमार तोमर, मुख्य अभियंता देवेंद्र चंद्र वर्मा, पीके सिंह अशोक सुंदरम, अधिशासी अभियंता रजनीश कुलश्रेष्ठ मौजूद रहे।
ट्रांसफार्मर की बची संभावित आयु का भी पता लगाया जा सकेगा
लैब में योरोपीय देशों की जानी-मानी कंपनियों से टेस्टिंग उपकरण मंगवाए गए हैंं। पावर और वितरण ट्रांसफार्मरों की जांच भी यहां हो सकेगी।अधिशासी अभियंता आशुतोष शुक्ला ने बताया कि लैब में लगी ट्रांसफार्मर टेस्ट बेंच में डिसाल्व गैस एनालाइजर लगा है। जब ट्रांसफार्मर आयल गरम होता है तो सात प्रकार की गैसें निकलती हैं। जिसमें एसिटलीन, कार्बन मोनो आक्साइड, एथेन, मेथेन जैसी गैसे शामिल हैं।
इस एनालाइजर से यह आंका जा सकेगा कि ट्रांसफार्मर की प्राइमरी और सेकेंड्री वाइंडिंग और उसमें प्रयोग किए पेपर इंसुलेशन की क्या स्थिति है। जिससे ट्रांसफार्मर कितने दिन तक सही कार्य करेगा यह जानकारी हो सकेगी। इसी तरह की जानकारी केबल और ब्रेकर आदि के बारे में लग सकेगी। जिससे फाल्ट होने के पहले ही उपकरणों को बदला जा सकेगा। बताया कि इससे खरीदे जाने वाले सामान की गुणवत्ता जांची सकेगी। अभी तक जांच के लिए दूसरी सरकारी और निजी प्रयोगशालाओं में भेजा जाता था।
ट्रांसफार्मर, पोल, लाइनों से परे होगी इलेक्ट्रोमैििग्नटक फ्यूजन प्रणाली
व्यवस्था में क्या आधुनिक प्रयोग हो रहे हैं इस बार में एसएम सिस्टम के चेयरमैन संजय मिश्रा ने बताया कि वर्तमान मेंं थर्मल पावर प्लांट से एक मेगा वाट बिजली बनाने का खर्च छह करोड़ के लगभग आता है। अमेरिका में कई कंपनियां इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्यूजन पर काम कर रही हैं।
इस तरह प्रणाली में बिजली उत्पादन का खर्च 20 करोड़ प्रति मेगावाट है। लेकिन इसकी विशेषता यह है कि इसे वहीं पर स्थापित किया जा सकेगा जहां पर बिजली की आवश्यकता है। इसमें लंबी परेषण लाइनों, पावर ट्रांसफार्मर और बड़े-बड़े उपकेंद्र बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। इस प्रणाली को भविष्य की ग्रीन एनर्जी का संज्ञा दी जा रही है।
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