लखनऊ 7 जनवरी (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार, संस्कृति विभाग द्वारा अभिलेखों एवं पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 19 से 23 जनवरी तक किया जा रहा है। यह कार्यशाला राज्य की अमूल्य लिखित सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की धरोहर संरक्षण के प्रति संवेदनशील दृष्टि को और अधिक सुदृढ़ करना है, साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों को अभिलेखीय एवं पांडुलिपि धरोहर से जोड़ते हुए इस क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार, शोध और करियर की संभावनाओं के प्रति जागरूक करना है।इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी एवं शिक्षक प्रमुख रूप से भाग लेंगे। कार्यशाला के दौरान रक्षा मंत्रालय के हिस्ट्री डिवीजन, राष्ट्रीय अभिलेखागार भारत सरकार तथा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आमंत्रित विषय-विशेषज्ञ अभिलेखों और पांडुलिपियों की पहचान, संरक्षण की आधुनिक तकनीक, प्रलेखन, डिजिटलीकरण तथा इनके अकादमिक और शोधात्मक महत्व पर विस्तृत व्याख्यान देंगे। इसके साथ ही प्रतिभागियों को व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से संरक्षण की प्रक्रियाओं से भी परिचित कराया जाएगा, जिससे वे इस क्षेत्र की तकनीकी और व्यावसायिक समझ विकसित कर सकें।यह प्रशिक्षण कार्यशाला ज्ञान भारतम मिशन की भावना के अनुरूप आयोजित की जा रही है, जिसके अंतर्गत भारत की प्राचीन और ऐतिहासिक ज्ञान-परंपरा, अभिलेखीय विरासत और पांडुलिपि धरोहरों के संरक्षण, पुनरुद्धार और व्यापक प्रसार पर विशेष बल दिया जा रहा है। इस दृष्टि से यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह युवाओं को भारत की लिखित सांस्कृतिक धरोहर से जोडऩे के साथ-साथ राष्ट्र की ज्ञान परंपरा को संरक्षित रखने में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करता है।कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य युवाओं में अभिलेखीय और पांडुलिपि धरोहरों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। इसके साथ ही प्रतिभागियों को अभिलेखागार, शोध संस्थानों, संरक्षण प्रयोगशालाओं और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार, शोध एवं व्यावसायिक अवसरों की जानकारी दी जाएगी। शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शैक्षणिक जगत और अभिलेखीय धरोहर संरक्षण के क्षेत्र के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में भी कार्य करेगा।संस्कृति विभाग का यह प्रयास राज्य की अमूल्य अभिलेखीय और पांडुलिपि धरोहर को संरक्षित करने तथा भावी पीढ़ी को भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा से जोडऩे की दिशा में एक ठोस और दूरगामी कदम माना जा रहा है। ज्ञान भारतम मिशन के आलोक में आयोजित यह कार्यशाला न केवल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि इस क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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