शिमला ,08 जनवरी (आरएनएस)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार देहरा निवासी अभिषेक सिंह भारद्वाज को करीब सात महीने बाद सशर्त जमानत प्रदान की है। जस्टिस राकेश कैंथला की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच शत्रुता समाप्त करने और शांति की इच्छा व्यक्त करना देशद्रोह नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत केवल विचार प्रकट करना या चर्चा करना तब तक राजद्रोह नहीं है, जब तक उससे सार्वजनिक शांति भंग होने या हिंसा भड़काने की मंशा अथवा प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने न आए। कोर्ट के अनुसार, आरोपी द्वारा की गई बातचीत या पोस्ट से ऐसी किसी भी मंशा के संकेत नहीं मिलते। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करते हुए पाया कि आरोपी ने भारत-पाक तनाव को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की थी और कहा था कि धर्म से ऊपर मानवता है तथा युद्ध का कोई सार्थक उद्देश्य नहीं होता। अदालत ने माना कि इस तरह की बातचीत से किसी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक अशांति को बढ़ावा नहीं मिलता।
सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने का ठोस आधार नहीं
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि एफआईआर में सरकार के खिलाफ नफरत या असंतोष फैलाने का कोई ठोस आरोप स्थापित नहीं होता। जांच के दौरान आरोपी के पास से कोई प्रतिबंधित हथियार भी बरामद नहीं हुआ। पेन ड्राइव, मोबाइल डेटा, तस्वीरों, वीडियो और चैट हिस्ट्री की जांच के बाद भी ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे गंभीर देशद्रोही गतिविधि सिद्ध हो सके।
हथियारों की तस्वीरें पोस्ट करना अपने आप में देशद्रोह नहीं
जस्टिस कैंथला ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित हथियारों की तस्वीरें पोस्ट करना, वह भी किसी के नाम के साथ, स्वत: देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता, विशेषकर तब जब आरोपी के पास से कोई हथियार बरामद न हुआ हो। वहीं ‘खालिस्तान जिंदाबादÓ नारे के आरोप पर अदालत ने कहा कि मोबाइल डेटा में ऐसा कोई नारा नहीं मिला। मान भी लिया जाए कि नारा लगाया गया हो, तो भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के अनुसार केवल नारा लगाना तब तक अपराध नहीं है, जब तक उससे हिंसा या अशांति न फैले।
इन शर्तों पर मिली जमानत
हाईकोर्ट ने अभिषेक भारद्वाज को इस शर्त पर जमानत दी कि वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा, प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहेगा, बिना सूचना सात दिन से अधिक पता नहीं बदलेगा, पासपोर्ट होने पर जमा करेगा, अपना मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया विवरण पुलिस व अदालत को देगा तथा किसी भी बदलाव की जानकारी समय पर देगा।
28 मई 2025 को हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि 28 मई 2025 को कांगड़ा पुलिस ने अभिषेक भारद्वाज को पाकिस्तान के लिए जासूसी के संदेह में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने फेसबुक पर पाकिस्तान के झंडे, प्रतिबंधित हथियारों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए थे तथा एक व्यक्ति के साथ चैट में ‘ऑपरेशन सिंदूरÓ को गलत बताते हुए खालिस्तान के समर्थन की बात कही थी। 20 वर्षीय अभिषेक देहरा के सुखाहर गांव का निवासी है और कॉलेज ड्रॉपआउट बताया गया है।
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