लखनऊ 8 जनवरी (आरएनएस ) । योगी सरकार गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जहां लाभार्थी परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है, वहीं योजना से जुड़े सरकारी और निजी अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित कर पूरी व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि बीते एक वर्ष में आयुष्मान योजना के अंतर्गत क्लेम निस्तारण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश के सूचीबद्ध अस्पतालों से प्राप्त होने वाले क्लेम के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 में क्लेम की पेंडेंसी जहां 10 लाख 75 हजार तक पहुंच गई थी, वहीं दिसंबर 2025 तक इसे घटाकर मात्र 3 लाख कर दिया गया है, जिसे भी शीघ्र ही निस्तारित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर माह औसतन 2 लाख से अधिक क्लेम प्राप्त होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले क्लेम का समयबद्ध निस्तारण एक बड़ी चुनौती है, इसके बावजूद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुराने लंबित मामलों के साथ-साथ नए क्लेम का भी नियमित और व्यवस्थित ढंग से निस्तारण हो, ताकि अस्पताल बिना किसी हीलाहवाली के आयुष्मान कार्डधारकों का इलाज जारी रखें।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर क्लेम निस्तारण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है। साचीज की एसीईओ पूजा यादव ने बताया कि मेडिकल ऑडिटरों की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 कर दी गई है, जिससे क्लेम की जांच प्रक्रिया में तेजी आई है। इसके साथ ही क्लेम प्रोसेसिंग डेस्क की संख्या भी 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत क्लेम का भुगतान 30 दिनों की निर्धारित समय-सीमा, यानी टर्न अराउंड टाइम के भीतर सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एजेंसी स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और लंबित मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रदेश के सूचीबद्ध अस्पतालों को क्लेम के सापेक्ष कुल 4,649 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार न केवल गरीबों के इलाज की गारंटी दे रही है, बल्कि अस्पतालों के आर्थिक हितों की भी पूरी तरह से रक्षा कर रही है, ताकि वे बिना किसी दबाव के जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें।योगी सरकार की इन नीतियों से क्लेम पेंडेंसी में आई कमी, समयबद्ध भुगतान व्यवस्था और मजबूत मेडिकल ऑडिट प्रणाली ने अस्पतालों का भरोसा बढ़ाया है। इसका सीधा लाभ गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कर्ज लेने या अपनी संपत्ति बेचने की मजबूरी से बड़ी राहत मिली है।
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