बिलासपुर 13 जनवरी 2023(आरएनएस) जिले के सरकारी स्कूलों में शौचालय निर्माण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। हाईकोर्ट के स्प्ष्ट निर्देश और तय समय-सीमा के बावजूद बड़ी संख्या में स्कूलों में शौचालयों का निर्माण और मरम्मत अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसका सबसे ज्यादा असर छात्राओं पर पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरी में खुले मे लघु शंकर दीर्घ शंका के लिए जाने को विवश होना पड़ रहा है।
525 स्कूलों में अधूरे शौचालय
हाईकोर्ट ने स्कूलों में शौचालय की स्थिति को गंभीर मानते हुए 15 जून तक सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी हालात इससे उलट हैं। जिले के 350 स्कूलों में शौचालयों की मरम्मत अधूरी है, जबकि 175 स्कूलों में नए शौचालयों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। कुल मिलाकर 525 स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों को को बुनियादी सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। इस स्थिति से छात्राओं को खास तौर पर परेशानी हो रही है। खुले में या झाड़ियों में जाने की मजबूरी उनकी गरिमा और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है, वहीं स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह बेहद गंभीर स्थिति है। शासन ने शौचालय निर्माण के लिए 2 करोड़ 31 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी। आरईएस को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और पहली किश्त के रूप में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी जारी की गई, लेकिन इसके बावजूद समय पर कार्य पूरा नहीं किया गया। बाद में यह जिम्मेदारी जिला और जनपद पंचायतों को दी गई। एक ओर स्वच्छता और बाल हित की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों को खुले में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद इस लापरवाही पर कब तक कार्रवाई होगी और बच्चों को कब बुनियादी सुविधा मिल पाएगी।
– लगभग 200 स्कूलों के कार्य अभी अपूर्ण हैं और 45 स्कूलों में काम शुरू ही नहीं हो पाया है। सभी कार्य जल्द पूरे कर लिए जाएंगे।
- संदीप कुमार अग्रवाल
सीईओ, जिला पंचायत
बिलासपुर

