अजय दीक्षित
अमेरिका की फौज द्वारा अपहृत वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो घटना ने,हो सकता है कि तृतीय विश्व युद्ध की नींव रख दी। यह सही है कि राष्ट्रपति मादुरो भी फर्जी चुनाव कराने, भ्रष्टाचार से जुड़े है लेकिन अमेरिका कोई हक नहीं कि वह किसी संप्रभु देश में इस तरह की कार्यवाही करे। अमेरिका डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में 21वीं सदी में इतना बड़ा साम्राज्य वादी देश बन सकता है यह अनुमान नहीं था क्योंकि पहले कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार कहा था कि हमें अच्छा आतंकवाद और बुरा आतंकवाद जैसा नहीं सोचना चाहिए। वेनेज़ुएला की इस घटना ने जैसे अमेरिका को नंगा कर दिया है कि कैसे अमेरिका विकसित राष्ट्र होते हुए भी गरीब देशों पर गिद्ध दृष्टि रखे है। डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यभार ग्रहण करने बाद पहले टैरिफ बार शुरू किया अब तो दादागिरी पर उतर आया है। यूएनओ और तमाम मानव अधिकार संगठनों को जैसे तक पर रख दिया है। सच्चाई तो यह है कि यूएनओ को तो बंद कर देना चाहिए। इस संस्थान में कोरे भाषण होते रहते हैं।
9 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले तीन करोड़ आबादी वाले देश वेनेज़ुएला इन दिनों भीषण अव्यवस्था से घिरा है। वेनेज़ुएला
303 मिलियन बैरेल का क्रूड ऑयल के विशाल भंडार समाए बेहद गरीब देश है।1970 में वेनेज़ुएला दुनियां के पांच अमीर देशों में से एक था । क्रूड ऑयल से कमाया धन वेनेज़ुएला सरकार ने देश में बहुत सी फ्री योजनाएं चलाई ।यहां तक कि नागरिकों महंगी शराब पीने के लिए उपलब्ध करा दी । वेनेज़ुएला के नागरिक सरकारी खर्चे पर विदेश चले जाते थे।1979 के दौर में वेनेज़ुएला में सभी तरह का उत्पादन बंद हो गया था केवल क्रूड ऑयल से कमाया धन से सब्जी, फल, अनाज, सब्जियां, कपड़े, बिल्डिंग मटेरियल आयात किया जाता था।सने सने वेनेज़ुएला का मुद्रा क्रोन की कीमत कम होती गई।2011 में हालत ऐसे हो गए कि वेनेज़ुएला की मुद्रा क्रोन तोल के हिसाब से देकर वस्तुएं अनाज, सब्जियां, कपड़े, बिल्डिंग मटेरियल, अंडे दुकानों से खरीदने पड़ते हैं। सरकार बड़ी संख्या में मुद्रा क्रोन छापनी पड़ती है। ऊपर से पहले शादेब और बाद निकोलस मादुरो फर्जी चुनाव कराकर सत्ता में बैठे थे। नोबल पुरस्कार विजेता
मार्चर्डो लगातार निकोलस मादुरो के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं। लेकिन अमेरिका के इस कृत्य से कोलंबिया, ब्राजील, ग्रीन लैंड,रूस, चीन में चिंता की लकीरें देखी जा रही है। यूक्रेन, पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, अन्य यूरोपीय देशों में यह आशंका फैल रही है कि कल को रूस , इसराइल,चीन जैसे शक्तिशाली राष्ट्र ने अपने हितों के लिए राष्ट्रपति को अपह्त करना शुरू कर दिया तो तृतीय विश्व युद्ध की नींव पड़ सकती है। आगामी दिनों में ईरान के अयातुल्ला खोमानी,पर इस तरह का संकट आ सकता है। इस घटना से परमाणु हथियारों को हासिल करने की होड़ भी बढऩे वाली है। दुनियां हथियारों खरीद भी बढ़ेंगी जिसमें कमजोर राष्ट्र पिस जायेगे। दूसरी ओर चीन, अमेरिका,रूस, फ्रांस, इटली,जैसे हथियार बनाने वाले देश तेजी से हथियार बनाने में लग जाएंगे।एक नए तरीके के उपनिवेशवाद का जन्म होगा ।जहां ताकतवर राष्ट्र कमजोर राष्ट्र पर कब्जा कर उनके संसाधनों का दोहन करेंगे । सोचिए अगर कल को पुतिन जलेशकी का अपहरण कर किस्सा ही खत्म कर दे। और पूरे यूक्रेन को अपना उपनिवेश बना ले ऐसा ही कुछ ईरान में घट सकता है। केवल परमाणु हथियारों की क्षमता वाले देशों पर यह संकट पैदा नहीं हो सकता क्योंकि परमाणु युद्ध का अंदेशा है। शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका किस हद तक दूसरे राष्ट्रों का शोषण करता है उसकी बानगी देखिए कि सऊदी अरब, कुवैत,यमन, दोहा,को तेल भंडारों के बदले अमेरिका के बे हिसाब हथियार खरीदने पड़ते हैं। अकेले सऊदी अरब के पास 400 एफ 16 लड़ाकू विमानों का बेड़ा है।
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