कोंडागांव 31 मई (आरएनएस) जहां विवाद गहराता जा रहा था, वहां पुलिस ने अदालत नहीं बल्कि संवाद का रास्ता चुना। कोंडागांव के ग्राम मिरमिंडा में दो गुटों में बंट चुके ग्रामीणों के बीच बढ़ती दूरियों को ‘सहयोग चौपाल’ ने खत्म कर दिया और वर्षों से चला आ रहा सामाजिक विवाद आपसी सहमति से सुलझ गया।
कोंडागांव पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा की नई पहल “सहयोग चौपाल” अब गांव-गांव में लोगों की समस्याओं और छोटे-बड़े विवादों का समाधान बनकर उभर रही है। इसी पहल के तहत ग्राम मिरमिंडा में गांडा समाज और गांव के अन्य लोगों के बीच चल रहे सामाजिक विवाद का सफल निराकरण किया गया। बताया गया कि गांडा समाज के लोगों ने आवेदन देकर शिकायत की थी कि उन्हें समाज से बहिष्कृत किया जा रहा है और गांव के कुछ लोग उनके घर आना-जाना भी बंद कर चुके हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चंद्रा के मार्गदर्शन और पुलिस अनुविभागीय अधिकारी रूपेश कुमार के पर्यवेक्षण में ग्राम मिरमिंडा में विशेष “सहयोग चौपाल” आयोजित की गई।
थाना प्रभारी माकड़ी ज्ञानेंद्र सिंह चौहान और तहसीलदार माकड़ी अंकुर रात्रे के नेतृत्व में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर उनकी बातें सुनी गईं। विवाद के हर पहलू पर चर्चा हुई। पुलिस और प्रशासन ने दोनों पक्षों को भाईचारा, सामाजिक सहभागिता और आपसी सम्मान के साथ रहने की समझाइश दी। लंबी चर्चा के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति पर पहुंचे और गांव में सौहार्द बनाए रखने पर सहमत हुए। इसके बाद सहमति का पंचनामा तैयार कर विवाद का औपचारिक निराकरण किया गया।
कोंडागांव पुलिस का कहना है कि “सहयोग चौपाल” केवल विवाद निपटाने की पहल नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे का मजबूत पुल है। सीमांकन विवाद, आपसी मनमुटाव, मुआवजा संबंधी मामले, विधिक परामर्श और सामाजिक मतभेद जैसे विषयों का समाधान अब लोगों के बीच पहुंचकर किया जा रहा है। बहरहाल, मिरमिंडा में सुलझा यह विवाद इस बात का संदेश देता है कि संवाद से बड़ी कोई ताकत नहीं होती और जब पुलिस जनता के बीच बैठती है, तो टकराव की जगह विश्वास जन्म लेता है।


