बांसवाड़ा ,14 जनवरी (आरएनएस)। भाजपा से इस्तीफा देने के महज 48 घंटे बाद पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के ठिकानों पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने छापेमारी की। सुबह जयपुर से आई एसीबी की टीम ने बांसवाड़ा जिले में उनके तीन ठिकानों पर दस्तावेजों की गहन जांच की। एसीबी टीम ने कलिंजरा क्षेत्र के भैरवजी कृपा फिलिंग स्टेशन, बागीदौरा स्थित भैरवजी फिलिंग स्टेशन और मोटी टिम्बी में स्थित क्रशर प्लांट पर कार्रवाई की। दोनों पेट्रोल पंप मालवीया के नाम हैं, जबकि क्रशर प्लांट उनके बेटे प्रेम प्रताप सिंह के नाम पर दर्ज है। पेट्रोल पंप मैनेजर का एक घंटे तक इंतजार
एसीबी की टीम सुबह करीब 9 बजे बागीदौरा पेट्रोल पंप पहुंची, लेकिन उस समय मैनेजर रामगोविंद मौके पर मौजूद नहीं थे। टीम ने करीब एक घंटे तक इंतजार किया। बाद में जमीन से जुड़े कागजात, लेन-देन और संचालन से संबंधित दस्तावेज जुटाए गए। इसके बाद टीम क्रशर प्लांट पहुंची, जहां रिकॉर्ड की जांच की गई।
दोपहर करीब 1 बजे टीम दोबारा बागीदौरा पेट्रोल पंप लौटी और मैनेजर से विस्तार से पूछताछ की। उनसे जमीन के स्वामित्व, पंप के ठेके या किराए, स्टाफ और वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल किए गए। इसके बाद टीम मैनेजर को साथ लेकर कलिंजरा स्थित दूसरे पेट्रोल पंप पहुंची, जहां भी इसी तरह की जांच हुई।
सूचना मिलते ही जयपुर से लौटे मालवीया
उधर, महेंद्रजीत सिंह मालवीया जयपुर जाने के लिए रवाना हो चुके थे, लेकिन एसीबी की कार्रवाई की सूचना मिलने पर वे पालोदा से ही वापस अपने आवास लौट आए। इस पर उन्होंने कहा,अगर मैं वापस नहीं आता तो लोग कहते कि मैं भाग गया। एसीबी ने मुझसे कोई पूछताछ नहीं की। यह पूरी कार्रवाई दबाव बनाने के लिए की गई है, ऐसा नहीं होना चाहिए।
कार्रवाई की टाइमिंग पर सियासी सवाल
एसीबी की रेड की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई मालवीया के भाजपा छोडऩे के फैसले के बाद राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। चर्चा है कि एसीबी की टीम सोमवार आधी रात को ही बांसवाड़ा पहुंच गई थी और उनके आवास के आसपास रुकी थी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पाला बदलने से बढ़ी राजनीतिक हलचल
महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने करीब 23 महीने पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की थी, लेकिन हाल ही में जयपुर में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में वापसी का ऐलान किया। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र सौंपकर दोबारा पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई थी।
लोकसभा चुनाव हारने के बाद भाजपा में उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी नहीं मिली थी। ऐसे में पंचायत राज चुनावों के जरिए वागड़ क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए वे कांग्रेस में वापसी की तैयारी कर रहे थे।
पहले भी लग चुके हैं दबाव में पार्टी बदलने के आरोप
गौरतलब है कि 19 फरवरी 2024 को भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई हुई थी। उस समय मालवीया पर भी जांच की अटकलें थीं। माना गया था कि संभावित कार्रवाई से बचने के लिए ही उन्होंने भाजपा जॉइन की थी।
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