मोतिहारी 17 Jan (Rns): बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने वाला है। मंदिर परिसर में आज दुनिया के सबसे भारी और विशाल शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। काले ग्रेनाइट पत्थर से बने इस शिवलिंग का वजन 210 टन है, जबकि इसकी ऊंचाई और गोलाई 33 फीट है। इस भव्य प्राण-प्रतिष्ठा और स्थापना कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विशेष रूप से शिरकत करेंगे।
विशालकाय क्रेनों से होगी स्थापना
शिवलिंग का आकार और वजन इतना अधिक है कि इसे स्थापित करना अपने आप में एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है। इस महाकाय शिवलिंग को उठाने और सही स्थान पर रखने के लिए विशेष प्रकार की दो क्रेनें मंगाई गई हैं। इन क्रेनों की क्षमता क्रमशः 700 टन और 500 टन है, जिन्हें विशेष तौर पर बंगाल और भोपाल से मोतिहारी लाया गया है। मंदिर प्रशासन ने स्थापना को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं।
कैथवलिया ही क्यों? त्रेतायुग से जुड़ा है गहरा नाता
विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए पूर्वी चंपारण के कैथवलिया गांव को चुने जाने के पीछे एक पौराणिक महत्व है। स्थानीय साधु-संतों के अनुसार, त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम माता सीता से विवाह के उपरांत जनकपुर से अयोध्या लौट रहे थे, तो उनकी बारात का एक रात्रि विश्राम इसी स्थान पर हुआ था। लोक मान्यताओं के मुताबिक, चूंकि यहां रामजी की ‘बहू’ (माता सीता) का ठहराव हुआ था, इसलिए कालांतर में पास के गांव का नाम ‘बहुआरा’ पड़ गया। मंदिर की चौहद्दी के पूर्व दिशा में बहुआरा गांव आज भी मौजूद है और निर्माणाधीन राम-जानकी पथ इसी रास्ते का अनुसरण कर रहा है।
मंदिर की वास्तुकला और भव्यता
विराट रामायण मंदिर न केवल अपने शिवलिंग के लिए, बल्कि अपनी विशालता के लिए भी विश्व विख्यात होगा। 150 एकड़ के लक्ष्य के साथ, फिलहाल 120 एकड़ में फैले इस परिसर में कुल 22 मंदिर और 12 शिखर बनाए जाएंगे। मुख्य मंदिर की लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी। मंदिर का मुख्य शिखर सबसे ऊंचा होगा, जिसकी ऊंचाई 270 फीट प्रस्तावित है। इसके अलावा परिसर की भव्यता बढ़ाने के लिए एक 190 फीट का शिखर, चार 180 फीट के शिखर, एक 135 फीट का और पांच 108 फीट ऊंचे शिखर बनाए जाएंगे। इस भव्यता की झलक पाने के लिए अभी से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है।
अयोध्या और जनकपुर के बीच आस्था का केंद्र
यह मंदिर भौगोलिक रूप से भी दो पवित्र धामों को जोड़ने वाली कड़ी बनेगा। प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या और माता सीता की जन्मभूमि जनकपुर (नेपाल) के बीच मोतिहारी के कैथवलिया में यह मंदिर आकार ले रहा है, जिसके आसपास के क्षेत्र का नामकरण ‘जानकी नगर’ किया गया है। राम-जानकी पथ मार्ग से अयोध्या से इस मंदिर की दूरी 315 किलोमीटर और जनकपुर धाम से करीब 115 किलोमीटर है। वहीं, राजधानी पटना से यह 120 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर भविष्य में राम-जानकी मार्ग पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का एक प्रमुख केंद्र होगा।

