लखनऊ,17 जनवरी (आरएनएस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में विजन इंडिया प्रोग्राम के तहत आयोजित होलेस्टिक हेल्थ समिट को संबोधित किया। इस समिट में वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा पर विस्तार से अपने विचार रखे।अखिलेश यादव ने कहा कि आज के समय में लोग केवल बीमारी या शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित चर्चा नहीं कर रहे हैं, बल्कि मानसिक स्थिति और भावनात्मक पहलुओं पर भी बात हो रही है। ऐसे में होलेस्टिक एप्रोच और हेल्दी लाइफ स्टाइल पर गंभीर विमर्श जरूरी है। उन्होंने कहा कि होलेस्टिक हेल्थ का अर्थ केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं है, बल्कि इसमें फिटनेस, संतुलित आहार, सकारात्मक सामाजिक सहयोग, खुशहाल कार्य वातावरण और बेहतर सामाजिक माहौल भी शामिल है। इसी कारण होलेस्टिक हेल्थ पर फोकस करना समय की मांग बन गया है।
उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य सेवाएं विफल होती हैं तो मेडिकल सेवाओं का सहारा लिया जाता है। हेल्थ प्रिवेंटिव कॉन्सेप्ट है जबकि मेडिकल क्यूरेटिव कॉन्सेप्ट। यदि होलेस्टिक हेल्थ पर सही ढंग से ध्यान दिया जाए तो लोग कम बीमार होंगे, जिससे समाज में खुशहाली और तरक्की बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का तन और मन तभी स्वस्थ रह सकता है जब उसके आसपास का वातावरण, कार्यस्थल का माहौल और सामाजिक दायरा सकारात्मक हो। आज के समय में नकारात्मकता तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली नकारात्मक सूचनाएं भी लोगों को प्रभावित कर रही हैं।अखिलेश यादव ने पर्यावरणीय कारकों का जिक्र करते हुए कहा कि सामाजिक, राजनीतिक और जलवायु संबंधी परिस्थितियां भी स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं। दिल्ली का वायु प्रदूषण, इंदौर की दूषित जलापूर्ति जैसे उदाहरण बताते हैं कि पर्यावरण और स्वास्थ्य का आपस में गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि जिस शहर को कभी सफाई के लिए पुरस्कार मिलते थे, वहीं पीने के पानी से मौतों की घटनाएं होना गंभीर चिंता का विषय है। वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण जैसी समस्याएं सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई हैं और होलेस्टिक हेल्थ में इन सभी पहलुओं को शामिल करना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार देश में होलेस्टिक हेल्थ की स्थिति केवल 30 प्रतिशत के आसपास है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत संतोषजनक नहीं है। आपातकालीन सेवाएं लगभग समाप्त होती जा रही हैं और उत्तर प्रदेश में तो इमरजेंसी सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है और ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनसे काम ज्यादा लिया जाता है, लेकिन उसके अनुरूप मानदेय और सुरक्षा नहीं दी जाती।अखिलेश यादव ने कहा कि होलेस्टिक हेल्थ के लिए सरकारों को पर्यावरणीय कारकों पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। नदियों की सफाई नहीं हो रही है, औद्योगिक कचरा नदियों में छोड़ा जा रहा है और वही दूषित पानी खेतों तक पहुंच रहा है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि योग पर बड़े-बड़े भाषण होते हैं, लेकिन स्कूल और कॉलेजों में बच्चों को इसकी व्यावहारिक जानकारी देने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। संपूर्ण स्वास्थ्य को लेकर सरकारों का योगदान संतोषजनक नहीं है और जरूरी आधारभूत ढांचा आज भी कमजोर है।
उन्होंने कहा कि होलेस्टिक हेल्थ आज केवल मेडिकल नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती भी बन चुकी है। लोगों को जागरूक करना होगा, सामाजिक रुकावटों को दूर करना होगा और स्वास्थ्य को एक बड़े और जरूरी मुद्दे के रूप में स्थापित करना होगा। प्रोएक्टिव वेलनेस पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल मेडिकल सेवाओं को मजबूत करना होगा। आहार, विहार, आचार और विचार को लेकर लोगों को संकल्प लेना होगा। सरकारों को स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे पर निवेश करना चाहिए और इसे खर्च के रूप में नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखना चाहिए।अखिलेश यादव ने कहा कि आशा कार्यकर्ता, डॉक्टर और नर्सें स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, इसलिए उनकी सर्विस सिक्योरिटी, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। यदि जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोग खुद असुरक्षा और चिंता में रहेंगे तो स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हो सकतीं। उन्होंने टेली मेडिसिन को हर पंचायत से जोडऩे, नियमित मेडिकल जांच को मुफ्त करने और डिजिटल तकनीक के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने समाजवादी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय सभी जांचें मुफ्त थीं और विधायकों को अपनी निधि से गरीबों के इलाज के लिए 25 लाख रुपये तक सहायता देने का अधिकार दिया गया था, ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी का इलाज न रुके। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता दी जाएगी, पर्याप्त बजट आवंटन होगा और स्वास्थ्य ढांचे को अन्य बुनियादी ढांचों के बराबर महत्व दिया जाएगा।
अखिलेश यादव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और सख्त नियमन जरूरी है। दवाओं के लाइसेंस, कोडीन कफ सिरप जैसे मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लापरवाही और मिलीभगत से समाज और खासकर बच्चों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि होलेस्टिक हेल्थ के लिए स्वास्थ्य को देश में एक जनआंदोलन का रूप देना होगा, ताकि लोग बीमार न हों और स्वस्थ जीवन जी सकें।कार्यक्रम में सांसद राजीव राय, पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्र और पूर्व आईएएस आलोक रंजन ने भी सक्रिय सहभागिता की और होलेस्टिक हेल्थ को लेकर अपने विचार साझा किए।
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