लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप पर काम करना, गलत पॉश्चर में बैठना और तनाव भरी दिनचर्या शरीर को धीरे-धीरे थका देती है। ऐसे में गर्दन के दर्द, कंधों की जकडऩ या पीठ में खिंचाव जैसी परेशानियां बढऩे लगती हैं। अगर आप भी इस तरह की किसी समस्या से परेशान हैं तो आपको नियमित रूप से उत्तानमंडूकासन करना चाहिए। योग केवल कुछ आसन करने का नाम नहीं है, बल्कि यह जीने की एक कला है, जो हमें अपने शरीर और मन दोनों के साथ संतुलन बनाना सिखाती है। नित्य योग के साथ अगर आप अपनी दिनचर्या को थोड़ा सा अनुशासित कर लें, तो इसका असर बहुत जल्दी महसूस होने लगता है। अगर आप अपने रोजाना के व्यायाम में उत्तानमंडूकासन को शामिल करते हैं, तो यह न सिर्फ शरीर को राहत देता है बल्कि अंदर से नई ऊर्जा भी भर देता है। उत्तानमंडूकासन खास तौर पर पीठ दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह रीढ़ की हड्डी को खिंचाव देता है और जकडऩ को कम करने में मदद करता है। इसके नियमित अभ्यास से ग्रीवा यानी गर्दन से जुड़ी तकलीफों में भी राहत मिल सकती है जो आजकल लगभग हर उम्र के लोगों की समस्या बन चुकी है।
यह आसन कंधों के आसपास जमी हुई अकडऩ को धीरे-धीरे खोलता है, जिससे कंधे हल्के और मुक्त महसूस होते हैं। साथ ही, छाती का विस्तार होने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे सांस लेना सहज और गहरा हो जाता है। जब सांस बेहतर होती है, तो शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह भी अच्छा रहता है और थकान कम महसूस होती है।
उत्तानमंडूकासन का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक असर डालता है। पेट के अंगों पर हल्का दबाव पडऩे से पाचन क्रिया सक्रिय होती है और गैस, अपच जैसी समस्याओं में लाभ मिल सकता है।
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