लखनऊ,07 फरवरी (आरएनएस)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के सचिव जीवक कुमार सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली तथा मीडियेशन एवं कंसीलियेशन प्रोजेक्ट कमेटी, सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में पूरे देश में 01 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0 संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मध्यस्थता की प्रक्रिया के माध्यम से न्यायालयों में लंबित मामलों का त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है, जिससे पक्षकारों को लंबे समय तक न्यायालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और आपसी सहमति से विवादों का अंत हो सके।उन्होंने बताया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में जनपद स्तर पर यह अभियान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह अभियान जनपद न्यायाधीश मलखान सिंह के कुशल निर्देशन में चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत जनपद के सभी न्यायालयों में लंबित मामलों को मध्यस्थता के लिए चिन्हित किया जा रहा है। अभियान के दायरे में सिविल न्यायालयों के साथ-साथ पारिवारिक न्यायालय, वाणिज्यिक न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, उपभोक्ता फोरम, भूमि अर्जन एवं भूमि अधिग्रहण पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण सहित अन्य संबंधित न्यायालयों और प्राधिकरणों में लंबित प्रकरणों का निस्तारण मध्यस्थता के माध्यम से कराया जाएगा।राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0 के अंतर्गत वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, घरेलू हिंसा से जुड़े मामले, चेक बाउंस के वाद, वाणिज्यिक और सेवा संबंधी विवाद, शमनीय आपराधिक प्रकरण, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली से जुड़े मामले, संपत्ति के बंटवारे, बेदखली से संबंधित वादों सहित अन्य उपयुक्त दीवानी मामलों और विभिन्न लंबित प्रार्थना पत्रों का समाधान आपसी सहमति से मध्यस्थता द्वारा किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में समय और खर्च दोनों की बचत होती है तथा पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध भी बने रहते हैं।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ ने जनपद के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वे 01 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक चल रहे राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0 में सक्रिय सहभागिता करें। जिन नागरिकों के वाद न्यायालयों में लंबित हैं, वे संबंधित न्यायालयों, कार्यालयों अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के कार्यालय से संपर्क कर मध्यस्थता की प्रक्रिया का लाभ उठाएं और अपने मामलों का शीघ्र, सरल और न्यायसंगत समाधान प्राप्त कर न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने में सहयोग करें।
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