भोपाल,07 फरवरी (आरएनएस)। राजधानी के निशांतपुरा थाना क्षेत्र में कम्युनिटी पुलिसिंग की भावना को धरातल पर उतारते हुए आयोजित 16 दिवसीय ‘सृजन’ कार्यक्रम का भव्य समापन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पुलिस विभाग और मुस्कान संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में गांधीनगर, आरिफ नगर, कमला नगर और एहसान नगर के लगभग 350 बच्चों ने भाग लेकर आत्मरक्षा और व्यक्तित्व विकास के गुर सीखे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. विनीत कपूर (ष्ठढ्ढत्र), किरण लता केरकेट्टा (ष्ठढ्ढत्र), मयूर खंडेलवाल (ष्ठष्टक्र्क ंह्रहृश्व-4), अमृत मीणा (्रढ्ढत्र) और अक्षय चौधरी (्रष्टक्क) निशातपुरा उपस्थित रहे। साथ ही थाना प्रभारी (ञ्जढ्ढ) मनोज पटवा, एस.आई. अशोक शर्मा एवं निशातपुरा थाने का समस्त स्टाफ, मुस्कान संस्था, यूथ फैसिलिटेटर्स सहित उदय संस्था के स्टाफ की विशेष उपस्थिति रही।
समारोह का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ, जिसके बाद बच्चों ने मराठी और गोंडी लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुति देकर सांस्कृतिक विविधता का परिचय दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मार्शल आर्ट और पावर वॉक का प्रदर्शन रहा। बच्चों ने अपनी शारीरिक क्षमता और आत्मरक्षा कौशल का प्रदर्शन करते हुए ‘शक्ति से सुरक्षा की ओर’ के संकल्प को जीवंत कर दिया।
बच्चों ने जब पुलिस की वर्दी पहनकर अनुशासित परेड की, तो हर कदम के साथ यह एहसास गहरा होता गया कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती—उसे बस अवसर और विश्वास चाहिए।
कार्यक्रम का सबसे सशक्त, सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब ष्ठष्टक्क जोन-4 मयूर खंडेलवाल ने अपनी पावर वॉक करती नन्ही बच्ची को, जो स्वयं पुलिस यूनिफ़ॉर्म में थी, अपनी ढ्ढक्कस् कैप महिला निरीक्षक के हाथों पहनवाई। यह दृश्य केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि बच्चों के लिए एक जीवित सपना था कि वे भी एक दिन इसी वर्दी में, इसी गरिमा के साथ समाज और देश की सेवा कर सकते हैं।
उस एक पल ने बच्चों के मन में आत्मविश्वास बोया, उनकी आँखों में भविष्य जगाया और यह संदेश दे दिया कि सही मार्गदर्शन, अनुशासन और संकल्प हो तो कोई भी बच्चा अपने सपनों तक पहुँच सकता है। यही क्षण इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि बना।
प्रशिक्षण के दौरान आए बदलावों पर चर्चा करते हुए बच्चों ने बताया कि इन 16 दिनों ने उनके भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को विकसित किया है। एक प्रतिभागी की माता ने भावुक होकर बताया कि कैसे उनकी बेटी अब पढ़ाई, घर के काम और प्रशिक्षण के बीच बेहतरीन संतुलन बना रही है।
मुख्य अतिथियों ने अपने उद्बोधन में माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी को दूर करने और मजबूत पारिवारिक संबंध बनाने पर जोर दिया, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव आ सके।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षक गोविंद और अन्य समन्वयकों ने प्रशिक्षण की चुनौतियों और बच्चों के व्यवहार में आए सुधारों की रिपोर्ट साझा की। सभी 350 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
यह आयोजन केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि पुलिस एवं आमजन के मध्य बढ़ते विश्वास, सहयोग एवं सहभागिता का सशक्त प्रतीक है।
‘सृजनÓ कार्यक्रम का उद्देश्य:-‘सृजनÓ मात्र एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि सामुदायिक सुरक्षा की दिशा में एक मानवीय पहल है। इसके माध्यम से पुलिस प्रशासन बस्तियों के बच्चों तक पहुँचकर उन्हें मार्शल आर्ट, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं जीवन कौशल (रुद्बद्घद्ग स्द्मद्बद्यद्यह्य) का प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे वे आत्मविश्वासी, सक्षम एवं जिम्मेदार नागरिक बन सकें और पुलिस को अपना विश्वसनीय साथी समझें।

