बिलासपुर,11 फरवरी (आरएनएस)। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चलाए गए बड़े एंटी नक्सल अभियान में शामिल पुलिस जवानों की आउट ऑफ टर्न प्रमोशन को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए लंबित प्रतिनिधित्व पर कानून के तहत दो महीने के भीतर निर्णय लिया जाए।
याचिकाकर्ता दीपक कुमार नायक, अग्नु राम कोर्राम और संगीत भास्कर वर्तमान में कांकेर जिले में पदस्थ हैं। उनका कहना है कि वे 15 और 16 अप्रैल 2024 को बीएसएफ के साथ संयुक्त रूप से चलाए गए बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन में शामिल थे।
बताया गया कि यह अभियान कांकेर जिले के कालपर-हापाटोला-छेटेबेठिया क्षेत्र में चलाया गया था, जहां सुरक्षा बलों की माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए थे और हथियार व गोला-बारूद बरामद किया गया था।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इस ऑपरेशन में कुल 187 पुलिसकर्मी शामिल थे, लेकिन शासन द्वारा केवल 54 जवानों को ही असामान्य पदोन्नति दी गई। उनका दावा है कि वे भी समान जोखिम और परिस्थितियों में अभियान का हिस्सा रहे, फिर भी उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिला।
इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने 25 जून 2025 को बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष प्रतिनिधित्व दिया था, जो अब तक लंबित है। हाईकोर्ट ने अब इस लंबित आवेदन पर तय समयसीमा में निर्णय लेने का निर्देश देकर मामले को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है।
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