सूरजपुर,12 फरवरी(आरएनएस)। पीएम सेजेस जयनगर के विद्यार्थियों के लिए एक शैक्षणिक एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने आकाशवाणी केंद्र अंबिकापुर, मौसम विभाग तथा हनीबी पार्क का दौरा कर विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारियाँ प्राप्त कीं।सबसे पहले विद्यार्थियों ने आकाशवाणी केंद्र, अंबिकापुर का भ्रमण किया। इस अवसर पर केंद्र के वरिष्ठ अभियंता अरुण श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को आकाशवाणी की कार्यप्रणाली एवं प्रसारण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी केंद्र से प्रसारित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम देश की जनजातीय सभ्यता और संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।विद्यार्थियों को बताया गया कि आकाशवाणी केंद्र में मुख्य रूप से दो विभाग कार्यरत हैं-इंजीनियरिंग विभाग एवं सांस्कृतिक विभाग। दोनों विभागों के समन्वय से विभिन्न कार्यक्रमों का सफल प्रसारण किया जाता है। विद्यार्थियों ने जाना कि आधुनिक मशीनों की सहायता से ध्वनि रिकॉर्डिंग, संपादन (एडिटिंग) तथा ट्रांसमीटर एवं एम्प्लीफायर के माध्यम से प्रसारण की प्रक्रिया किस प्रकार संपन्न होती है। साथ ही, भारत सरकार द्वारा संचालित आकाशवाणी मोबाइल ऐप के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसके माध्यम से देश के सभी आकाशवाणी केंद्रों के कार्यक्रम इंटरनेट के जरिए कहीं भी सुने जा सकते हैं।इसके पश्चात विद्यार्थियों ने मौसम विभाग का दौरा किया, जहां शिवानी मिश्रा ने विभिन्न मौसम मापक उपकरणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विद्यार्थियों को इवैपोरेशन मीटर द्वारा पानी के वाष्पीकरण की मात्रा ज्ञात करने की प्रक्रिया समझाई गई। एनीमोमीटर से हवा की गति तथा विंड वेन से हवा की दिशा मापने की जानकारी दी गई।साथ ही स्टीवेंसन स्क्रीन में लगे चार थर्मामीटर, अधिकतम, न्यूनतम, ड्राई बल्ब एवं वेट बल्ब कार्यों के बारे में बताया गया, जिनसे तापमान एवं आद्र्रता का मापन किया जाता है। विद्यार्थियों ने ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन के बारे में भी जानकारी प्राप्त की, जहाँ से सभी मौसम संबंधी आंकड़े स्वचालित रूप से दर्ज होकर रडार के माध्यम से दिल्ली भेजे जाते हैं।भ्रमण के अंतिम चरण में विद्यार्थी हनीबी पार्क पहुँचे, जहाँ उन्होंने मधुमक्खियों के जीवन चक्र और शहद निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जाना। उन्हें बताया गया कि एक छत्ते में एक रानी मधुमक्खी (क्वीन बी) और अनेक श्रमिक मधुमक्खियाँ (वर्कर बी) होती हैं। मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन की प्रक्रिया को एपिकल्चर कहा जाता है।यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं तकनीकी दृष्टि से उपयोगी सिद्ध हुआ। इससे विद्यार्थियों को प्रसारण तकनीक, मौसम विज्ञान तथा मधुमक्खी पालन जैसे विविध क्षेत्रों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई, जो उनके सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगी।
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