एन दयासिंधु /ऋषिकेश टी कृष्णन
रायपुर
12 फरवरी 2026(आरएनएस) भारत में एआई की अंतिम सफलता इसके जीपीयू क्लस्टरों के आकार से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि हमारे एआई अनुप्रयोग नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में कैसे सुधार ला सकते हैं – उदाहरण के लिए, जब एआई आशा कार्यकर्ताओं को उच्च जोखिम वाली गर्भवती स्त्रियों का पता लगाने में मदद करता है, या छोटे किसानों को कीटनाशक की खपत पर महत्वपूर्ण कमी लाने में मदद करता है, या एक दूर-दराज स्थित सरकारी स्कूल के बच्चे की पढ़ाई और गणित में अंक बढ़ाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 इस बात में व्यावहारिक है कि भारत एआई का लाभ कैसे उठा सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण में भारतीय एआई आर्थिक परिषद ने प्रस्ताव किया है कि एआई का प्रमुख उद्देश्य मानव प्रधानता और आर्थिक हित पर आधारित है। इस बात में स्पष्टता है कि राष्ट्रीय स्तर पर एआई अपनाने की नीति को मानव कल्याण और आर्थिक समावेश में सहायक होना चाहिए। एआई को घरेलू आर्थिक वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और एआई अपनाने के लाभ अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों और सभी नागरिकों तक पहुँचने चाहिए।
सौभाग्य से, हमारे लिए, भारतीय नवोन्मेषक ऐसे एआई अनुप्रयोगों को आगे बढ़ा रहे हैं, जो उन सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को हल करते हैं, जो तात्कालिक तौर पर और भारत के संदर्भ में प्रासंगिक हैं। स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, शहरी प्रबंधन और आपदा तैयारी से जुड़े अनुप्रयोग आशाजनक हैं। सही समर्थन के साथ, इनमें से कई अनुप्रयोगों का पूरे भारत में विस्तार किया जा सकता है और भविष्य में इन्हें भारत एआई अनुप्रयोग भण्डार में शामिल किया जा सकता है, और यहां तक कि इन्हें वैश्विक बाजारों में भी ले जाया जा सकता है। आइए कुछ रोचक पहलों पर नजर डालें।
स्वास्थ्य देखभाल: निरामई ने बिना किसी दवा-सुई वाला (नॉन-इनवेसिव), गोपनीयता के प्रति जागरूक स्तन कैंसर जांच उपकरण विकसित किया है, जो पारंपरिक मैमोग्राफी के बजाय एआई-संचालित थर्मल इमेजिंग का उपयोग करता है। यह उपकरण सभी उम्र की महिलाओं में असामान्य स्थिति का शीघ्र पता लगाने में सक्षम बनाता है, जिसमें घने स्तन ऊतक भी शामिल हैं जहां मैमोग्राफी अक्सर विफल हो जाती है। यह आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने लायक और किफायती है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जांच को व्यावहारिक बनाता है। Qure.ai एक एआई उपकरण है, जो सेकंडों में एक्स-रे और सीटी स्कैन का विश्लेषण करता है, टीबी, फेफड़ों के कैंसर और दिल की समस्या जैसी 35 से अधिक स्थितियों का पता लगाता है। यह समाधान संसाधन-सीमित परिस्थितियों में बहुत प्रभावी है जहां रेडियोलॉजिस्ट अनुपलब्ध हैं तथा दूरदराज के जिलों में तेजी से प्राथमिक परीक्षण और उपचार की सुविधा प्रदान करते हैं। एआईस्टेथ, एक एआई-संचालित स्टेथोस्कोप, हृदय और फेफड़ों की आवाज़ों को सटीक, दूरस्थ निदान के लिए दृश्य तरंग रूपों में बदल देता है। यह किफायती उपकरण 93% सटीकता के साथ ग्रामीण भारत में स्वास्थ्यकर्मियों को शुरुआती दौर में ही हृदय और श्वसन समस्याओं का पता लगाने में सक्षम बनाता है। यह विशेषज्ञ देखभाल में मौजूद महत्वपूर्ण कमी को समाप्त करता है और इसमें भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की क्षमता है।
कृषि: न्योपर्क एक हल्का-फुल्का उपकरण है, जो इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी और मशीन लर्निंग का उपयोग करके पारंपरिक लैब रसायनों के बिना तुरंत मिट्टी के स्वास्थ्य का विश्लेषण करता है। यह पांच मिनट से कम समय में 12 प्रमुख मृदा-मानकों पर लैब-सटीक परिणाम प्रदान करता है। यह किसानों को उर्वरक के उपयोग पर डेटा-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है, जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होता है और इनपुट खर्च में कमी आती है। वाधवानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता संस्थान का कॉटनऐस एक एआई -आधारित मोबाइल ऐप है जो किसानों को जाल में पकड़े गए कीड़ों के फोटो अपलोड करने की सुविधा देता है और कीटनाशक के उपयोग को लेकर तत्काल, स्थान-अनुकूल सलाह प्राप्त करता है। यह ऐप हज़ारों छोटे कपास किसानों को पिंक बुलवर्म जैसे कीड़ों से अपनी फसल की रक्षा करने में मदद करता है, जिससे उच्च गुणवत्ता की फसल मिलती है और आय में वृद्धि होती है। निको रोबोटिक्स एआई -संचालित रोबोट का उपयोग करता है, जो कंप्यूटर विज़न (दिन और रात वाले कैमरे) से लैस हैं, ताकि वास्तविक समय में कीड़े और खरपतवार की पहचान की जा सके। यह प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव को सक्षम बनाता है तथा इससे यह भी सुनिश्चित होता है कि रसायनों का उपयोग केवल आवश्यक जगहों पर ही किया जाएगा। इससे कीटनाशकों के उपयोग में महत्वपूर्ण कमी आई है (कुछ मामलों में 60-90% तक), जिससे किसानों की लागत घटती है और पर्यावरण विषाक्तता कम होती है। क्रॉपिन एक एआई-सक्षम डिजिटल इकोसिस्टम है जो खेत की निगरानी, क्रेडिट जोखिम विश्लेषण और किसान सहभागिता तक फैला हुआ है। यह स्थायी उत्पादकता और जलवायु-अनुकूल निर्णयों को बढ़ावा देता है, हिस्सों में बंटी प्रथाओं को अनुमान-योग्य कृषि प्रणालियों में बदल देता है, जिसका वैश्विक स्तर विस्तार किया जा सकता है।
शिक्षा: पढ़ाईविदएआई एक एआई-संचालित व्यक्तिगत ज्ञान-प्राप्ति प्लेटफार्म का उपयोग करता है, जिसे सरकारी स्कूलों में गणित सीखने के कमजोर परिणामों में को सुधार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। केवल छह सप्ताह में, इस पहल ने उत्तीर्ण होने की दर और उच्च-प्राप्त करने वालों के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण सुधार किया। यह ग्रामीण भारतीय शिक्षा में सीखने के अंतर को पाटने के लिए एक ऐसे मॉडल के रूप में काम करता है, जिसके पैमाने का विस्तार किया जा सकता है। राकेट लर्निंग के पास अप्पू (एक जनरेटिव एआई हाथी) नामक एआई संचालित शिक्षा साथी है, जो माता-पिता और बच्चों के साथ व्हाट्सएप के जरिए संवाद करता है। यह छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आधारभूत साक्षरता और अंकगणित कौशल प्राप्त करने में मदद करने के लिए छोटे-छोटे, खेल-आधारित गतिविधियाँ प्रदान करता है। बेलगावी स्मार्ट सिटी अपने सार्वजनिक पुस्तकालय में डीप लर्निंग-सक्षम ई-बुक्स को एकीकृत कर रहा है। उपयोगकर्ता के व्यवहार का विश्लेषण करने और कहानी की रूपरेखा, शब्दावली और कठिनाई स्तर को वास्तविक समय में अनुकूलित करने के लिए डिज़ाइन की गई इन किताबों ने सहभागिता और समझ के स्तर में सुधार किया है। केवल दो सप्ताह में पढ़ने की गति में 12% वृद्धि हुई है।
सरकार इन जमीनी स्तर पर केंद्रित एआई नवाचारों के लिए एक शक्तिशाली इकोसिस्टम आयोजक बन सकती है और इन्हें पूरे भारत में उच्च-प्रभाव वाले अनुप्रयोगों तक विस्तार करने में मदद कर सकती है। सरकार का एक मुख्य ध्यान इन एआई अनुप्रयोगों के लिए बाजार बनाने में सहायता करना भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, सरकार खरीद की सुविधा प्रदान कर सकती है, जहां सूचीबद्ध घरेलू एआई अनुप्रयोग सरकार (राज्य सरकार सहित) के विभागों, अस्पतालों, स्कूलों आदि के लिए समाधान प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा आदि में एआई के लिए मानक स्थापित करके, सरकार एक विश्वसनीय वातावरण बना सकती है, ताकि ग्राहक और नागरिक इन्हें आसानी से अपना सकें।
एक बार जब ये एआई अनुप्रयोग खुद को साबित कर लेते हैं, तो सरकार सबसे प्रभावशाली अनुप्रयोगों को भारत एआई अनुप्रयोग भंडार में एकीकृत करने में सुविधा प्रदान कर सकती है – यानी, ऐसे समाधान जो भारत के पैमाने और विविधता के लिए बनाए गए हैं और विश्व स्तर पर उपयोग करने के लिए तैयार हैं। हम ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन एआई जैसे प्लेटफॉर्म का लाभ उठा सकते हैं। भारतीय एआई अनुप्रयोग भंडार के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय शासन रूपरेखा, जो यूरोपीय जीडीपीआर जैसी अंतर्राष्ट्रीय रूपरेखाओं के साथ मेल खाती हो, इस भंडार को कई देशों में तुरंत शुरू करने (प्लग-एंड-प्ले) के योग्य बना सकता है।
ऋषिकेश टी कृष्णन आईआईएम बैंगलोर में रणनीति के प्रोफेसर हैं। एन दयासिंधु इतिहास रिसर्च एंड डिजिटल के सह-संस्थापक और सीईओ हैं।)*


















