न्यूयॉर्क ,13 फरवरी । ऊर्जा सुरक्षा और किफायती कीमतों के बीच संतुलन साधते हुए भारत ने अमेरिका को अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए गैस की आवश्यकता तो है, लेकिन वह महंगी गैस नहीं खरीदेगा। पेट्रोनेट एलएनजी के प्रमुख अक्षय कुमार सिंह ने अमेरिका को संदेश देते हुए कहा कि अगर कीमतें सही और सस्ती होंगी, तभी भारत वहां से एलएनजी (रुहृत्र) खरीदेगा। उनका कहना है कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए सस्ती और फायदेमंद ऊर्जा सुनिश्चित करना है, इसलिए अमेरिकी गैस का सौदा तभी संभव होगा जब उसकी कीमत अन्य ईंधनों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी और किफायती हो।
कीमत सही होगी तभी बढ़ेगी खपत
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पेट्रोनेट एलएनजी के सीईओ अक्षय कुमार सिंह ने कहा कि भारत केवल ऐसी गैस खरीदने में दिलचस्पी रखता है जो लोगों की जेब पर भारी न पड़े। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर गैस की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी, तभी लोग इसे पेट्रोल, डीजल या कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों के विकल्प के तौर पर अपनाएंगे। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को लेकर बातचीत का दौर तेज हो गया है और दोनों देश नए समझौतों की ओर देख रहे हैं।
व्यापार समझौते के बीच भारत का बड़ा बयान
यह बयान कूटनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क 50त्न से घटाकर 18त्न करने की घोषणा की थी। इसके बदले में अमेरिका की अपेक्षा है कि भारत वहां से अपना आयात दोगुना से अधिक करे। आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 132 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत करीब 41 अरब डॉलर के फायदे (ञ्जह्म्ड्डस्रद्ग स्ह्वह्म्श्चद्यह्वह्य) में है। भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने की मंशा जताई है, हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इतना बड़ा लक्ष्य व्यापारिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सस्ती गैस की मांग भारत की मोलभाव करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
गैस की खपत बढ़ाने पर सरकार का जोर
भारत वर्तमान में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक देश है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2030 तक भारत के कुल ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 6त्न से बढ़ाकर 15त्न किया जाएगा। देश में फर्टिलाइजर, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, रिफाइनिंग और बिजली सेक्टर में गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि, चुनौती यह है कि देश में करीब 27,000 मेगावॉट की गैस आधारित बिजली उत्पादन क्षमता मौजूद है, लेकिन सस्ती गैस न मिल पाने के कारण ये प्लांट अपनी क्षमता के एक-चौथाई से भी कम पर चल रहे हैं। ऐसे में सस्ती एलएनजी की उपलब्धता इन प्लांट्स को फिर से पूरी क्षमता से चलाने के लिए बेहद जरूरी है।
लॉन्ग टर्म सौदों पर पेट्रोनेट की नजर
पेट्रोनेट, जो अभी मुख्य रूप से कतर और ऑस्ट्रेलिया से गैस आयात करता है, अब आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए लंबी अवधि (लॉन्ग टर्म) के समझौतों की संभावनाएं तलाश रहा है। भविष्य की मांग को देखते हुए कंपनी अपने बुनियादी ढांचे को भी मजबूत कर रही है। पेट्रोनेट अपने मौजूदा टर्मिनल की क्षमता बढ़ा रही है और साथ ही पूर्वी तट पर एक नया आयात टर्मिनल भी बना रही है, ताकि देश के हर हिस्से में गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
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