० इतिहास से अवगत कराने के लिए नई पीढ़ी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना जरूरी है
रायपुर, 14 फरवरी (आरएनएस)। महाकौशल इतिहास परिषद के अध्यक्ष डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र ने प्रेस क्लब रायपुर पहुंचकर पत्रकारवार्ता में अवगत कराया कि रायपुर का प्राचीन इतिहास अत्यंत समृद्ध है। जहां आज मोती बाग एवं शास्त्री बाजार है वहां 1857 की क्रांति के समय जेल हुआ करती थी। पास में ही वहां पर राजा का किला था जो अस्पताल वार्ड में आज भी जर्जर हालात में स्थित है। उन्होंने कहा कि रायपुर जेल में तत्कालीन क्रांतिकारियों शहीद वीर नारायण सिंह क्रांतिकारी सुरेंद्र साय एवं अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को रखा गया था। टाउन हाल वंदे मातरम सभा कक्ष हुआ करता था। भोसले साम्राज्य ने कोतवाली की स्थापना की थी। विरोध के बावजूद भी उक्त कोतवाली को तोड़ा गया। इसी तरह हटकेश्वरनाथ मंदिर खारून नदी में स्थित कर निर्माण हठकेश्वर राजा ने करवाया था उन्होंने कहा कि रायपुर के इतिहास को सरकार को संरक्षित करे एवं आने वाली पीढिय़ों को इतिहास से अवगत कराने के लिए महाविद्यालयों एवं शालाओं में इतिहास विषय में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
1375 में रतनपुर की कल्चुरियों की शाखा रायपुर राज्य में खल्लारी में स्थापित हुई है। रायपुर को सतयुग में कनकपुर त्रेतायुग में हटकपुर, द्वापरयुग में कंचनपुर तथा कलयुग में रायपुर कहे जाने की जानकारी हुई है। 1458 का बूढ़ातालाब से लगा हुआ राजघाट था। जो आज घासीदास संग्रहालय के नाम से जाना जाता है।
एस शर्मा
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