० सामने आई तुलार गुफा की अनसुनी कहानी
अर्जुन झा
जगदलपुर, 16 फरवरी (आरएनएस)। महुआ और बांस के घनघोर जंगलों के बीच स्थित तुलार गुफा सच में एक अद्भुत और रहस्यमयी स्थान है। यहां रोमांच और आस्था का अतुलनीय अनुभव होता है। एक समय यह इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, लोग नाम सुनकर ही डर जाते थे। लेकिन आज वही स्थान भगवान की भक्ति और श्रद्धा का केंद्र बन चुका है। समय कैसे करवट लेता है, इसका जीता-जागता उदाहरण है तुलार गुफा। यह गुफा बारसूर सातधार पार करने के बाद छिंदबहार हांडावाडा रोड पर दांयी ओर स्थित है। तुलारगुफा तक पहुंचना आसान नहीं है। ऊंची-ऊंची पहाडिय़ां, घुमावदार पगडंडियां, सातधार के बहते नाले, छोटी -छोटी नदियों को पार करके आगे बढऩा पड़ता है। कई जगह रास्ता इतना संकरा कि बहुत संभलकर चलना पड़ता है। सच कहें तो बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह यात्रा थोड़ा कठिन है। जंगल में ऊंचे-ऊंचे महुआ और बांस के पेड़ प्राकृतिक प्रहरी की तरह खड़े नजर आते हैं। हवा जब बांस के झुरमुट से गुजरती है तो एक अलग ही संगीत सुनाई देता है। महुआ की खुशबू और जंगल की शांति मन को भीतर तक छू जाती है। गुफा तक पहुंचते-पहुंचते समझ में आता है कि भगवान अपने भक्तों की परीक्षा जरूर लेते हैं। कठिन रास्ता, पसीना, थकान सब कुछ सहने के बाद जब गुफा में विराजमान महादेव के दर्शन होते हैं तो सारी थकान पल भर में दूर हो जाती है। तुलार गुफा केवल एक स्थान नहीं, बल्कि साहस, आस्था और बदलाव की कहानी है। इसे नहीं देखा, उसने सच में क्या देखा? यह धर्म स्थल ओरछा क्षेत्र में आता है और संभवत: छिंदबहार विकासखंड में स्थित है। शिव के इस धाम तक बड़ी गाडिय़ां नहीं जा पाती हैं। फोर व्हीलर को रास्ते में खड़े कर पूरा सफर पैदल या बाइक के जरिए तय किया जा सकता हैसाथ में कुछ खाने का सामान रखा जाए तो ठीक है क्योंकि उसे क्षेत्र में कुछ भी नहीं मिलता ना ही पंचर बनाने की दुकान है।
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