रायपुर, 16 फरवरी (आरएनएस)। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेन्द्र नामदेव ने ई मेल और जोहो मेल से पत्र भेज कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से विधायक एवं सांसद को प्रदत्त आजीवन पेंशन व्यवस्था पर पुनर्विचार करते हुए इसे समाप्त या अंशदायी प्रणाली से जोडऩे की मांग की है। जारी बयान में नामदेव ने कहा कि देश के करोड़ों कर्मचारी और पेंशनर लंबी सेवा, नियमित अंशदान एवं वैधानिक पात्रता के बाद पेंशन प्राप्त करते हैं, जबकि जनप्रतिनिधियों को अल्प कार्यकाल के पश्चात भी आजीवन पेंशन का प्रावधान है। यह व्यवस्था समानता एवं वित्तीय न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कई राज्य वर्तमान पेंशनरों को केंद्र सरकार के समान महंगाई राहत (डीआर) प्रदान नहीं कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में वित्तीय संकट का हवाला देकर 81 माह की एरियर राशि का भुगतान अब तक लंबित है। महासंघ का कहना है कि एक ओर राज्य सरकारें वित्तीय अभाव का तर्क देकर सामान्य पेंशनरों की वैधानिक देय राशि रोक रही हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों को राज्य बजट से केंद्र के समान सभी पेंशन सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। यह दोहरा मापदंड न केवल असमानता को दर्शाता है, बल्कि पेंशनरों के साथ अन्याय भी है। महासंघ ने निम्न बिंदुओं पर पुनर्विचार की मांग की है—
जनप्रतिनिधियों की आजीवन पेंशन व्यवस्था की समीक्षा।
बहु-पेंशन की प्रथा समाप्त की जाए।
पेंशन को अंशदायी मॉडल से जोड़ा जाए।
राज्यों में लंबित 81 माह की डीआर एरियर राशि का शीघ्र भुगतान।
सभी वर्गों के पेंशनरों के साथ समान नीति लागू की जाए।
नामदेव ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस विषय पर व्यापक विमर्श कर न्यायसंगत एवं पारदर्शी नीति बनाई जाए, जिससे आर्थिक अनुशासन के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित हो सके।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि पेंशन व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और वित्तीय संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से उठाई गई है।
०
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी


















