बेंगलुरु 17 Feb, (Rns): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को कर्नाटक हाई कोर्ट से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने विधानसभा चुनावों के दौरान कथित मानहानि से जुड़े एक चुनावी कंटेंट को लेकर उनके खिलाफ दर्ज की गई निजी शिकायत को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। यह अहम आदेश जस्टिस सुनील दत्त यादव की अध्यक्षता वाली सिंगल बेंच ने सुनाया है। यह पूरा मामला तत्कालीन बीजेपी सरकार पर निशाना साधने वाले एक ‘करप्शन रेट कार्ड’ विज्ञापन से जुड़ा था, जिसे राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया था।
क्या था ‘करप्शन रेट कार्ड’ और पूरा चुनावी विवाद?
यह पूरा सियासी और कानूनी विवाद कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय शुरू हुआ था। उस दौरान कांग्रेस पार्टी ने राज्य की तत्कालीन बीजेपी सरकार के खिलाफ एक बेहद आक्रामक विज्ञापन अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत ‘करप्शन रेट कार्ड’ जारी किया गया था, जिसके जरिए सरकार पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे। जब राहुल गांधी ने इस कंटेंट को सोशल मीडिया पर प्रचारित किया, तो इसे आधार बनाते हुए उनके खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई।
निचली अदालत के समन को हाई कोर्ट में दी गई थी चुनौती
इस विज्ञापन के सामने आने के बाद बीजेपी समर्थक केशव प्रसाद ने राहुल गांधी के खिलाफ एक निजी शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए निचली अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी कर दिए थे। इसके बाद कांग्रेस नेता ने इन समन के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने मजबूती से तर्क दिया कि यह विज्ञापन केवल एक राजनीतिक चुनाव प्रचार अभियान का हिस्सा था और इसमें व्यक्तिगत मानहानि का कोई पुख्ता मामला नहीं बनता है।
जस्टिस सुनील दत्त यादव की बेंच ने खत्म किया केस
कर्नाटक हाई कोर्ट ने राहुल गांधी के वकीलों की दलीलों को स्वीकार कर लिया। जस्टिस सुनील दत्त यादव की बेंच ने मामले की विस्तृत सुनवाई करने के बाद दर्ज की गई उस निजी शिकायत को ही सेट-असाइड (रद्द) कर दिया। हाई कोर्ट के इस अहम फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब इस ‘करप्शन रेट कार्ड’ मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कोई ट्रायल या कानूनी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी, जिससे उन्हें चुनाव प्रचार के बीच एक बड़ा सियासी और कानूनी सुकून मिला है।

