भोपाल 18 फरवरी (आरएनएस)। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा है कि वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में वर्ष 2026-27 का प्रस्तुत बजट मध्यप्रदेश को विकास की नई दिशा देने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में बनाए गए इस बजट में महिला, युवा, अन्नदाता और गरीब वर्ग पर विशेष फोकस किया गया है। बजट में पशुपालन एवं डेयरी विभाग पर विशेष ध्यान दिया गया है।
राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि यह बजट प्रदेश के सर्वहारा वर्ग के कल्याण के साथ मध्यप्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने वाला बजट है। बीते वर्ष को उद्योग वर्ष के रूप में मनाया गया था, जबकि वर्ष 2026-27 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन करने वाला प्रदेश है। सरकार दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री वृंदावन योजना लागू की गई है तथा पशुपालन को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत डेयरी स्थापना के लिए हितग्राहियों को अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के तहत मध्यप्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन का राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ अनुबंध किया जा चुका है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 707 ग्राम है जो राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम से लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में संचालित लगभग 3 हजार गो-शालाओं में 4 लाख 75 हजार गौवंश का संरक्षण एवं पालन किया जा रहा है। स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना के लिए नई नीति तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत आधुनिक पद्धति से गो-शालाओं का संचालन किया जाएगा तथा जैविक खाद, पंचगव्य एवं बायोगैस का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए रूपये 2 हजार 365 करोड़ का प्रावधान बजट में प्रस्तावित है। इसमें गो संवर्धन एवं पशुओं का संवर्धन योजना के लिए 620 करोड़ 50 लाख रुपये एवं मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

