नई दिल्ली ,20 फरवरी (आरएनएस)। भारत ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अमेरिकी नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिकाÓ (क्कड्ड& स्द्बद्यद्बष्ड्ड) में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस महत्वपूर्ण घोषणापत्र पर हस्ताक्षर होने के बाद अब भारत को क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) के लिए अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने में भारी मदद मिलेगी। इस वैश्विक साझेदारी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ मेटल्स) के आयात के लिए भारत की चीन पर भारी निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, तकनीक के इस अहम क्षेत्र में ड्रैगन के एकाधिकार और प्रभुत्व को भी कड़ी चुनौती मिलेगी।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हुआ ऐतिहासिक समझौता
राजधानी नई दिल्ली में चल रहे ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026Ó के दौरान इस अहम घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना और भविष्य के नेक्स्ट जेनरेशन बिजनेस के लिए जरूरी संसाधनों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना है। यह कदम प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (ढ्ढठ्ठस्रद्बड्ड-स् ञ्जह्म्ड्डस्रद्ग ष्ठद्गड्डद्य) को अंतिम रूप देने और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। ज्ञात हो कि पैक्स सिलिका की शुरुआत पिछले साल दिसंबर में वाशिंगटन में आयोजित एक समिट में हुई थी, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजऱाइल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, यूएई और यूके जैसे कई प्रमुख देश शामिल हुए थे। अमेरिकी आर्थिक मामलों के उप सचिव जैकब हेलबर्ग के नेतृत्व में काम कर रहा यह गठबंधन 20वीं सदी की तेल-इस्पात निर्भरता से निकलकर 21वीं सदी में सिलिकॉन और महत्वपूर्ण खनिजों द्वारा संचालित अर्थव्यवस्था की ओर एक बड़े बदलाव का प्रतीक है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को मिलेगा जबरदस्त बूम
पैक्स सिलिका का अहम साझेदार बनने से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को भी सीधा और तगड़ा फायदा पहुंचने वाला है। देश में पहले से ही 10 सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं और कई अन्य पर तेजी से काम चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही देश का पहला सेमीकंडक्टर संयंत्र कमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरू कर देगा। इस मौके पर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस पहल को 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने वाला एक बेहद जरूरी रणनीतिक गठबंधन करार दिया। उन्होंने भारत की बेहतरीन इंजीनियरिंग प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इस मजबूत साझेदारी का मुख्य लक्ष्य वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद एआई तकनीक को बढ़ावा देना और भारत-अमेरिका टेक पार्टनरशिप को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
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