0 पेंशनर्स महासंघ अध्यक्ष ने बजट प्रतिक्रिया में उठाए सवाल बताया -यह बजट पेंशनरों के लिए बेहद निराशाजनक
0 कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना का स्वागत, लेकिन पेंशनरों को वंचित रखना अन्याय
रायपुर, 24 फरवरी (आरएनएस)। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ कर्मचारी नेता वीरेन्द्र नामदेव ने राज्य विधानसभा में आज पेश किए गए आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के आम बजट पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया दी है । उन्होंने इस बजट को छत्तीसगढ़ सरकार के लाखों पेंशनरों के लिए बेहद निराशाजनक बताया है ।
श्री नामदेव ने यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी के बजट भाषण में पेंशनरों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता का अभाव रहा, जिससे वरिष्ठ नागरिकों के इस वर्ग में निराशा व्याप्त है। प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने बताया कि वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपने बजट भाषण में कहा कि पेंशन भुगतान का डिजिटलीकरण नहीं होने से अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। आठ माह के प्रयासों के बाद इसे पूर्ण रूप से डिजिटलीकृत किया गया है। इस प्रक्रिया में यह तथ्य सामने आया कि छत्तीसगढ़ सरकार को मध्यप्रदेश सरकार से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होना है, जो भविष्य में मिलने पर पेंशन भार में कमी लाएगी। इस पर श्री नामदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के पेंशनरों की यह राशि वर्ष 2018-19 से आज तक मध्य प्रदेश में लंबित है । राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) के प्रावधान के तहत यह छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश सरकार की ओर से मिलनी चाहिए थी, जो नहीं मिली। नामदेव ने प्रश्न उठाया कि छत्तीसगढ़ के पेंशनरों की दस हजार करोड़ की इतनी बड़ी राशि की लेनदारी वर्षों तक मध्यप्रदेश में लंबित क्यों और कैसे रही? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह राशि छत्तीसगढ़ सरकार को कब और किस प्रक्रिया से प्राप्त होगी? इन महत्वपूर्ण प्रश्नों पर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी आज के बजट भाषण में नहीं दी गई, जिससे पेंशनरों में निराशा व्याप्त है। बढ़ती महंगाई के इस कठिन समय में राज्य के पेंशनरों को उम्मीद थी कि उन्हें केन्द्र के समान तीन प्रतिशत महंगाई राहत (डी. आर.)जुलाई 2025 से एरियर्स सहित मिलेगी, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार के आज पेश हुए बजट से उन्हें इसमें भी निराश होना पड़ा है ।
श्री नामदेव ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य सरकार द्वारा शासकीय सेवकों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना लागू करने तथा इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने की घोषणा स्वागत योग्य तो है, लेकिन पेंशनरों को इस योजना के दायरे में शामिल नहीं किया जाना वरिष्ठ नागरिकों के प्रति गंभीर अन्याय है। महासंघ का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने जीवन भर राज्य की सेवा है, इसलिए उन्हें कैशलेस इलाज की इस सुविधा से वंचित रखना उचित नहीं है।
महासंघ से जुड़े पदाधिकारियों — जे.पी. मिश्रा, अनिल गोल्हानी, टी.पी. सिंह, बी.एस. दसमेर, प्रवीण कुमार त्रिवेदी, आर.जी. बोहरे, ओ.डी. शर्मा, हरेंद्र चंद्राकर, लोचन पांडेय, एम.एन. पाठक, नरसिंग राम, एम.आर. वर्मा, अनिल तिवारी, अनिल पाठक, शैलेन्द्र कुमार सिन्हा, टी.एल. चंद्राकर, आर.के. नारद, शरद अग्रवाल, आर.के. टंडन, कौशलेंद्र मिश्रा, आर.के. दीक्षित, आर.के. साहू, बी.डी. मानिकपुरी, कैलाश राव, सी.एल. चंद्रवंशी, सोमेश्वर प्रसाद तिवारी, नागेन्द्र सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी बजट को पेंशनरों के लिए निराशाजनक बताया है।महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि पेंशनरों के के लिए महंगाई राहत, एरियर्स भुगतान और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा जैसे गंभीर मुद्दों पर शीघ्र ठोस निर्णय लेकर न्याय सुनिश्चित किया जाए।
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