ओटावा ,26 फरवरी । प्रधानमंत्री रूड्डह्म्द्म ष्टड्डह्म्ठ्ठद्ग4 की प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा से पहले कनाडा की ओर से बड़ा संकेत मिला है। कनाडा ने कहा है कि देश में हो रही हिंसक घटनाओं से भारत का अब कोई संबंध नहीं पाया गया है। इसे ओटावा के बदले रुख के रूप में देखा जा रहा है।
ञ्जशह्म्शठ्ठह्लश स्ह्लड्डह्म् की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ कनाडाई अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ओटावा और नई दिल्ली के बीच सुरक्षा वार्ताओं में प्रगति हुई है। उन्होंने बताया, हमारे बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों सहित उच्च स्तर पर मजबूत राजनयिक संवाद जारी है और हमें भरोसा है कि ऐसी गतिविधियां अब नहीं हो रहीं।
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री छ्वह्वह्यह्लद्बठ्ठ ञ्जह्म्ह्वस्रद्गड्डह्व के कार्यकाल में कनाडा ने भारत पर अपने यहां हिंसा और विदेशी हस्तक्षेप में शामिल होने के आरोप लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को लगातार निराधार और मनगढ़ंत बताते हुए खारिज किया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा का ताजा बयान भारत के लिए राहतभरा हो सकता है, लेकिन कुछ सिख संगठनों की चिंताएं बरकरार हैं। ब्रिटिश कोलंबिया के धार्मिक नेता मोनींदर सिंह ने दावा किया कि वैंकूवर पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को संभावित खतरे की चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि जून 2023 में उनके सहयोगी ॥ड्डह्म्स्रद्गद्गश्च स्द्बठ्ठद्दद्ध हृद्बद्भद्भड्डह्म् की ब्रिटिश कोलंबिया के लोअर मेनलैंड स्थित एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या के बाद से उन्हें कई बार ऐसी चेतावनियां मिल चुकी हैं।
निज्जर की हत्या के बाद द्विपक्षीय संबंधों में उस समय गंभीर तनाव पैदा हो गया था, जब ट्रूडो सरकार ने भारत सरकार से जुड़े एजेंटों पर संलिप्तता का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया, जिससे रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए। भारत ने तब भी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि कनाडा सिख उग्रवादियों को पनाह देता है।
अब कार्नी सरकार का कहना है कि वह सुरक्षा खतरों को गंभीरता से लेती है और उन्हें दूर करने के लिए भारत के साथ सहयोग कर रही है। कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत से जुड़े एजेंटों द्वारा सक्रिय विदेशी हस्तक्षेप या दमन को लेकर फिलहाल कोई ठोस चिंता लागू नहीं होती।
कनाडा सरकार ने बयान में कहा कि कानून का सम्मान भारत के साथ हमारे संबंधों की कुंजी है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच संवाद और सहयोग ही चरणबद्ध पुन: जुड़ाव का आधार रहेगा।
फिलहाल ओटावा भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने और 1.4 अरब की आबादी वाले उभरते आर्थिक शक्ति केंद्र के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे कनाडा को अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ष्ठशठ्ठड्डद्यस्र ञ्जह्म्ह्वद्वश्च के नेतृत्व में अमेरिका की नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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