नई दिल्ली ,28 फरवरी। केंद्र सरकार ने हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए विमानों में खतरनाक वस्तुओं के परिवहन से जुड़े नियमों में व्यापक संशोधन किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए प्रावधानों में प्रमाणन और जवाबदेही-आधारित व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की चूक पर सीधे जवाबदेही तय की जा सके।
खतरनाक सामान का तात्पर्य उन वस्तुओं या पदार्थों से है, जो स्वास्थ्य, सुरक्षा, संपत्ति या पर्यावरण के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं। नियमों में खतरनाक वस्तु ले जाने की जानकारी देने संबंधी प्रविधान को कड़ा किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसी वस्तुओं को बिना घोषणा या गलत जानकारी देकर विमान में ले जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नए नियमों के तहत नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (ष्ठत्रष्ट्र) को विशेष अधिकार दिए गए हैं। यदि खतरनाक वस्तुओं के प्रबंधन में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो डीजीसीए जांच के आदेश दे सकेगा और आवश्यक कार्रवाई कर सकेगा।
‘विमान (खतरनाक वस्तुओं का परिवहन) नियम, 2026Ó को 17 फरवरी को हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद अधिसूचित किया गया। अब भारतीय एयरलाइंस को खतरनाक वस्तुओं के परिवहन के लिए डीजीसीए से अनिवार्य प्रमाणन प्राप्त करना होगा। वहीं, विदेशी विमानन कंपनियों को भारत से या भारत के लिए ऐसी वस्तुएं ले जाने से पहले पूर्व-अनुमति लेनी होगी।
विमानन क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2003 के पुराने नियम मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के मानकों के अनुरूप थे, लेकिन नए प्रावधानों में निगरानी तंत्र को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है। इससे हवाई यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
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