नई दिल्ली 23 अपै्रल ,। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए ऑटो डेबिट के नियमों में अहम बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने डिजिटल पेमेंट के लिए नया ई-मैंडेट फ्रेमवर्क जारी कर दिया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य यूजर्स के डिजिटल लेनदेन को सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। इस बदलाव के बाद अब ग्राहकों को बार-बार होने वाले ऑनलाइन पेमेंट्स पर पहले से कहीं ज्यादा कंट्रोल मिलेगा और बिना उनकी मर्जी के खाते से पैसे कटना मुश्किल हो जाएगा।
15 हजार रुपये तक के लेनदेन के लिए नहीं होगी ह्रञ्जक्क की जरूरत
आरबीआई के नए ई-मैंडेट फ्रेमवर्क के मुताबिक, अब बार-बार होने वाले पेमेंट्स यानी ऑटो डेबिट के लिए 15,000 रुपये की नई लिमिट तय कर दी गई है। सबसे बड़ी राहत यह है कि इस लिमिट तक के ऑटो-पेमेंट के लिए अब ग्राहकों को ओटीपी या पिन डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से ग्राहकों को पहली बार रजिस्ट्रेशन करते समय एक बार एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (एएफए) पूरा करना होगा। इसके बाद तय लिमिट के भीतर का पेमेंट अपने आप हो जाएगा, लेकिन 15,000 रुपये से ज्यादा के किसी भी लेनदेन के लिए ओटीपी के जरिए अतिरिक्त सत्यापन करना अनिवार्य होगा।
बीमा और क्रेडिट कार्ड बिल के लिए मिली 1 लाख तक की छूट
सामान्य डिजिटल लेनदेन के अलावा, केंद्रीय बैंक ने कुछ विशेष और बड़े भुगतानों के लिए इस लिमिट को काफी बढ़ा दिया है। नए नियमों के तहत बीमा प्रीमियम का भुगतान, म्यूचुअल फंड की किश्त और क्रेडिट कार्ड बिल सेटलमेंट जैसे जरूरी ट्रांजैक्शंस के लिए यह लिमिट एक लाख रुपये प्रति लेनदेन तय की गई है। इसके साथ ही रेगुलेटर ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि हर रजिस्टर्ड मैंडेट की टाइमलाइन स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए, ताकि ग्राहकों का पूरा नियंत्रण बना रहे और वे अपनी मर्जी के अनुसार इसे कभी भी बदल सकें या हमेशा के लिए रद्द कर सकें।
खाते से पैसे कटने के 24 घंटे पहले मिलेगा प्री-डेबिट अलर्ट
नए नियमों में ग्राहकों की सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाते हुए अलर्ट सिस्टम को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। अब बैंकों को किसी भी रिकरिंग पेमेंट या ऑटो डेबिट से कम से कम 24 घंटे पहले ग्राहक के मोबाइल पर प्री-डेबिट की सूचना भेजनी होगी। इस अलर्ट मैसेज में मर्चेंट के नाम से लेकर कटने वाली कुल रकम और डेबिट की तारीख स्पष्ट रूप से दर्ज होगी। इस नियम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि ग्राहक चाहे तो वह पैसे कटने से पहले ही उस पेमेंट को आसानी से कैंसिल कर सकता है। ऑटो डेबिट होने से पहले और पैसे कटने के तुरंत बाद भी ग्राहकों को बैंक की तरफ से फटाफट अलर्ट भेजा जाएगा।
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