मुंबई ,28 फरवरी। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का भयंकर दबाव देखने को मिला। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट पर मानों भूचाल आ गया। सेंसेक्स में करीब 1,050 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 81,159 के स्तर पर आ गिरा, जबकि निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा लुढ़ककर 25,200 के अहम स्तर से नीचे खिसक गया। इस चौतरफा बिकवाली के कारण निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है और चंद घंटों में ही उनके 5.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक डूब गए।
एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में मची भारी तबाही
बाजार में लगातार दूसरे सत्र में यह बड़ी गिरावट जारी रही, जिसका मुख्य कारण एफएमसीजी, ऑटो, रियल्टी और फार्मा सेक्टर के शेयरों में हुई भारी बिकवाली रही। इस अभूतपूर्व दबाव के चलते बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) घटकर लगभग 463 लाख करोड़ रुपये रह गया है। सेंसेक्स पर सन फार्मा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल और बजाज फिनसर्व के शेयरों ने सबसे ज्यादा नुकसान उठाया। वहीं, आईटी सेक्टर के दिग्गज शेयरों जैसे इंफोसिस और एचसीएल टेक के साथ ट्रेंट के शेयर ही शुरुआत में बढ़त बनाने में कामयाब रहे, लेकिन बाद में टीसीएस जैसी कंपनियों ने भी अपना मुनाफा गंवा दिया और लाल निशान में चली गईं।
विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली से बिगड़ा बाजार का मूड
शेयर बाजार में आई इस भारी गिरावट का एक प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (स्नढ्ढढ्ढ) द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली को माना जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने एक दिन पहले लगभग 3,466 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। हालांकि, इस घबराहट भरे माहौल के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (ष्ठढ्ढढ्ढ) ने बाजार को संभालने का प्रयास किया और 5,032 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, लेकिन चौतरफा बिकवाली के आगे यह प्रयास बाजार को गिरावट से रोकने के लिए नाकाफी साबित हुआ।
कमजोर ग्लोबल संकेत और अमेरिका-ईरान तनाव का असर
घरेलू कारणों के साथ-साथ वैश्विक बाजारों से मिले निराशाजनक संकेतों ने भी भारतीय बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। वॉल स्ट्रीट पर टेक शेयरों से भरा नैस्डैक इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ, जहां दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी एनवीडिया, गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट, अमेजन और एएमडी जैसे दिग्गज शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद वैश्विक निवेशकों में डर का माहौल है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है।
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