तेहरान ,01 मार्च । अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ कथित संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन की खबरों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि देश का अगला सर्वोच्च नेता कौन होगा। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन उत्तराधिकार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ईरान के संविधान के अनुसार, 88 वरिष्ठ इस्लामी विद्वानों की संस्था ‘विशेषज्ञों की सभाÓ (्रह्यह्यद्गद्वड्ढद्य4 शद्घ श्व&श्चद्गह्म्ह्लह्य) नए सर्वोच्च नेता के चयन के लिए जिम्मेदार होती है। इस निकाय के सदस्यों को ‘गार्जियन काउंसिलÓ से अनुमोदन प्राप्त होता है। सुप्रीम लीडर के पद रिक्त होने या उनके दायित्व निभाने में असमर्थ होने की स्थिति में यही संस्था नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू करती है।
ईरान में पहले से कोई औपचारिक उत्तराधिकारी तय नहीं होता, इसलिए किसी एक नाम की गारंटी नहीं मानी जाती। फिर भी कुछ प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में रहते हैं।
कौन हैं संभावित दावेदार
हुज्जत-उल-इस्लाम मोहसेन कोमी
कोमी को खामेनेई का करीबी माना जाता रहा है। धार्मिक प्रतिष्ठान और सत्ता संरचना में उनकी गहरी पैठ है। उन्हें निरंतरता बनाए रखने वाले चेहरे के रूप में देखा जाता है।
आयतुल्लाह मोहसेन अराकी
अराकी लंबे समय से विशेषज्ञों की सभा के सदस्य हैं। धार्मिक प्रभाव और संस्थागत अनुभव के कारण वे मजबूत दावेदार माने जाते हैं। रूढि़वादी धड़े में उनकी अच्छी पकड़ है।
आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी
अराफी विशेषज्ञों की सभा और गार्जियन काउंसिल दोनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। वे ईरान की मदरसा प्रणाली के प्रमुख भी हैं और धार्मिक मामलों में उनकी विश्वसनीयता मानी जाती है।
आयतुल्लाह हाशेम हुसैनी बुशेहरी
बुशेहरी विशेषज्ञों की सभा के सदस्य हैं और धार्मिक प्रतिष्ठा रखते हैं। हालांकि सार्वजनिक चर्चाओं में उनका नाम अपेक्षाकृत कम सामने आता है, फिर भी उन्हें संभावित उम्मीदवारों में गिना जाता है।
आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई
एजेई वर्तमान में ईरान के न्यायपालिका प्रमुख हैं और पूर्व खुफिया अधिकारी भी रह चुके हैं। सुरक्षा तंत्र और राजनीतिक अभिजात वर्ग में उनके मजबूत संबंध उन्हें अहम दावेदार बनाते हैं।
फिलहाल, आधिकारिक घोषणा और विशेषज्ञों की सभा की संभावित बैठक पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। नए सुप्रीम लीडर का चयन ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।
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