तेहरान ,01 मार्च । इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए ताजा सैन्य हमलों के बीच ईरान के रक्षा मंत्री ्रद्वद्बह्म् हृड्डह्यद्बह्म्5ड्डस्रद्गद्ध और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर रूशद्धड्डद्वद्वड्डस्र क्कड्डद्मश्चशह्वह्म् के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इजरायली सैन्य कार्रवाइयों से परिचित दो सूत्रों और एक क्षेत्रीय स्रोत के हवाले से यह दावा किया है। हालांकि, ईरान सरकार की ओर से अब तक इन मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
‘पूर्व-निवारकÓ हमलों का दावा
ञ्जद्धद्ग ञ्जद्बद्वद्गह्य शद्घ ढ्ढह्यह्म्ड्डद्गद्य की रिपोर्ट के मुताबिक, ये हमले आज सुबह ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों पर किए गए। इजरायली अधिकारियों का प्रारंभिक आकलन है कि ढ्ढक्रत्रष्ट प्रमुख, रक्षा मंत्री और खुफिया तंत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी हमलों की चपेट में आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता ्रद्यद्ब ्यद्धड्डद्वद्गठ्ठद्गद्ब और राष्ट्रपति रूड्डह्यशह्वस्र क्कद्ग5द्गह्यद्धद्मद्बड्डठ्ठ समेत कई शीर्ष पदाधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिश की गई, हालांकि उनके संबंध में हमलों के परिणाम स्पष्ट नहीं हैं।
2025 में संभाली थी ढ्ढक्रत्रष्ट की कमान
ढ्ढह्यद्यड्डद्वद्बष् क्रद्ग1शद्यह्वह्लद्बशठ्ठड्डह्म्4 त्रह्वड्डह्म्स्र ष्टशह्म्श्चह्य ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य और सुरक्षा इकाई मानी जाती है, जो सीधे सर्वोच्च नेता के अधीन कार्य करती है। जनरल मोहम्मद पाकपोर ने जून 2025 के संघर्ष में अपने पूर्ववर्ती ॥शह्यह्यद्गद्बठ्ठ स्ड्डद्यड्डद्वद्ब की मौत के बाद कमान संभाली थी। वहीं, अमीर नसीरजादेह रक्षा मंत्री के रूप में ईरान की सैन्य नीतियों और हथियार विकास कार्यक्रमों में अहम भूमिका निभा रहे थे। यदि इन मौतों की पुष्टि होती है, तो इसे ईरान की सैन्य संरचना के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
ईरान की ओर से फिलहाल इन दावों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि पहले हमले बंद होने चाहिए, तभी किसी संभावित वार्ता पर विचार किया जा सकता है।
हमलों के बाद इजरायल में हवाई हमले के सायरन बजने की खबर है और कई उड़ानें प्रभावित हुई हैं। ईरान ने एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और जवाबी कार्रवाई की तैयारी के संकेत दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत की पुष्टि होती है, तो यह जून 2025 के 12-दिवसीय संघर्ष के बाद की सबसे बड़ी घटना साबित हो सकती है। इससे मध्य-पूर्व में व्यापक संघर्ष और प्रॉक्सी समूहों की सक्रियता बढऩे की आशंका जताई जा रही है।
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