भोपाल 1 मार्च (आरएनएस)। हिंदी भवन में आयोजित होने वाली सनातन हिंदू धर्मसभा को लेकर आयोजकों ने रविवार को विस्तृत जानकारी दी। धर्म सुधाकर सेवा समिति के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन का उद्देश्य सनातन के मूल स्वरूप को समझाना, समरसता का संदेश देना और समाज को एकता के सूत्र में बांधना बताया गया है।
समिति के संस्थापक आचार्य पंडित योगेंद्र शास्त्री व्याकरण शिक्षाचार कार्यक्रम ने कहा कि संस्था मध्यप्रदेश सहित पूरे भारतवर्ष में सनातन धर्मसभाएं आयोजित कर रही है, ताकि लोग सनातन के वास्तविक स्वरूप अहिंसा, करुणा और ‘वसुधैव कुटुंबकमÓ को समझ सकें। उनके अनुसार सनातन किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण विश्व को परिवार मानने की भावना सिखाता है।
उन्होंने कहा कि धर्मशास्त्रों ने मानवता को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश दिया है। सभा का मुख्य उद्देश्य समाज में समरसता और एकता की भावना उत्पन्न करना है, ताकि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जो विघटनकारी घटनाएं सामने आ रही हैं, उन्हें समाप्त करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास हो सकें।
आचार्य योगेंद्र शास्त्री ने सरकार से सनातन बोर्ड के गठन की मांग भी रखी। उनका कहना है कि वर्तमान समय में नकली साधु-संत और स्वयंभू धर्मगुरुओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में एक अधिकृत बोर्ड बनने से वास्तविक और अप्रामाणिक व्यक्तियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित किया जा सकेगा और सनातन परंपरा की संरक्षा सुनिश्चित होगी।
हाल ही में किन्नर शंकराचार्य के रूप में चर्चा में आए हिमान सिंह के सखी बनने के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि धर्मशास्त्रों में किन्नर को शंकराचार्य बनाए जाने का उल्लेख नहीं मिलता। शास्त्रीय परंपरा के अनुसार शंकराचार्य का चयन चारों पीठों के मान्य शंकराचार्यों द्वारा ही किया जाता है। उनका तर्क है कि राजनीतिक या बाहरी हस्तक्षेप से शंकराचार्य का चयन नहीं हो सकता।

