ईरान ,03 मार्च । अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रही खूनी जंग अब मिडिल ईस्ट में एक भयानक रूप लेती जा रही है। ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई करते हुए लगातार मिसाइलों और ड्रोनों की बारिश की जा रही है। इस खौफनाक लड़ाई की आंच अब दुबई तक पहुंच गई है, जहां ईरान ने नए और बड़े हमले किए हैं। ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सेना से जुड़े ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। ईरान का दावा है कि उसके इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैनिक हैं। इसी कड़ी में ईरान ने दुबई के पास अल मिन्हाद स्थित ऑस्ट्रेलियाई मिलिट्री फैसिलिटी पर बड़ा हमला बोल दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई बेस पर मिसाइल अटैक, रक्षा मंत्री ने की पुष्टि
ईरान के इस दुस्साहस के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि ईरानी फोर्स ने अल मिन्हाद एयर बेस पर जोरदार हमला किया है। आपको बता दें कि इस एयर बेस पर बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक और सैनिक तैनात हैं। हालांकि, रक्षा मंत्री ने राहत की सांस लेते हुए बताया है कि फिलहाल सभी सैनिक सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क स्थापित कर लिया गया है।
खाड़ी देशों में फंसे पश्चिमी सैनिक, बढ़ रही है असुरक्षा
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस वक्त मिडिल ईस्ट में उनके सौ से ज्यादा लोग मौजूद हैं, जिनमें से ज्यादातर संयुक्त अरब अमीरात (्रश्व) में तैनात हैं। अल मिन्हाद में कई सालों से ऑस्ट्रेलिया का एक अहम ऑपरेशनल हेडक्वार्टर काम कर रहा है। ये ताजा हमले ऐसे वक्त में हुए हैं जब खाड़ी देशों में ईरान लगातार अपनी ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों को तेज कर चुका है। ईरान के निशाने पर मुख्य रूप से अमेरिकी मिलिट्री एसेट्स हैं। जैसे-जैसे यह जंग विकराल रूप ले रही है, पश्चिमी देशों के सैनिक और उनके बेस खुद को पहले से कहीं ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
‘ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस 4Ó से कतर से कुवैत तक दहशत
इन हमलों से पहले ईरान की खूंखार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (ढ्ढक्रत्रष्ट) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दुनिया को खुली चेतावनी दी थी। आईआरजीसी ने ऐलान किया था कि वह ‘ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस 4Ó के तहत अमेरिकी बेस और संपत्तियों को तबाह कर रहा है। गौरतलब है कि ईरान का यह भयानक ऑपरेशन 28 फरवरी की सुबह अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमले का सीधा और कड़ा जवाब है।
खतरे में पड़ी दुबई की चमक, दांव पर हजारों की जान
ईरान के क्रोध की ज्वाला केवल दुबई तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर भी ताबड़तोड़ हमले किए हैं। ये सभी स्थान प्रमुख अमेरिकी मिलिट्री बेस माने जाते हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका के करीब 13 बड़े मिलिट्री बेस हैं, जहां 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक हमेशा तैनात रहते हैं। अब तक दुबई का चमकता हुआ शहर इस अस्थिर मिडिल ईस्ट में सबसे सुरक्षित पनाहगाह माना जाता था, जहां ईरानी बिजनेसमैन से लेकर अमेरिकी सेलिब्रिटी और रूसी अरबपति एक शानदार जिंदगी जीते थे। लेकिन ईरान के इन ताजा और खौफनाक हमलों के बाद से इस सपनों के शहर में भी दहशत और भारी तनाव का माहौल बन गया है।
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