वाशिंगटन ,06 मार्च । ईरान पर अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी के महाविनाशकारी हमले के बाद एक ऐसा खौफनाक सच दुनिया के सामने आया है, जिसने इंसानियत की रूह कंपा दी है। इस भीषण बमबारी में दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में स्थित लड़कियों के एक स्कूल को निशाना बनाया गया, जहां 150 मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत की खबर ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया है। खून से सने इस खौफनाक मंजर के बाद हर कोई यह सवाल पूछ रहा है कि क्या महायुद्ध की आड़ में मासूमों का कत्लेआम जायज है? अगर यह एक भयानक गलती थी, तो इसका असली गुनहगार कौन है? अब इस पूरे मामले में एक ऐसी चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने सीधे तौर पर अमेरिका को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, खुद अमेरिकी सैन्य जांचकर्ताओं को इस बात का गहरा शक है कि 150 बच्चियों की मौत के पीछे अमेरिकी सेना का ही हाथ हो सकता है। हालांकि, जांच अभी अपने शुरुआती चरण में है और कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है, लेकिन दो शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर इस बात के स्पष्ट संकेत दिए हैं। रॉयटर्स की इस रिपोर्ट में अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि स्कूल पर तबाही मचाने वाला हथियार कौन सा था और क्या अमेरिका ने जानबूझकर इस खौफनाक घटना को अंजाम दिया या यह किसी मिसाइल की दिशा भटकने का नतीजा था। अधिकारियों का यह भी मानना है कि जांच आगे बढऩे पर शायद नई जानकारी सामने आए और किसी तीसरे पक्ष की साजिश का पर्दाफाश हो सके।
इस भीषण नरसंहार को लेकर जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरान के राजदूत अली बहरीन ने दावा किया है कि इस दर्दनाक हमले में 150 छात्राएं मारी गई हैं। पूरी दुनिया से उठते सवालों और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बुधवार को आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि अमेरिकी सेना इस दिल दहला देने वाली घटना की गहन जांच कर रही है। उन्होंने बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिका कभी भी जानबूझकर नागरिक ठिकानों को अपना निशाना नहीं बनाता। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी साफ तौर पर कहा है कि यदि यह हमला उनकी तरफ से हुआ है, तो युद्ध विभाग इसकी पूरी जिम्मेदारी के साथ जांच करेगा।
इस संवेदनशील मुद्दे पर व्हाइट हाउस भी बेहद सतर्क नजर आ रहा है। प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने सीधे तौर पर इस जांच पर कोई टिप्पणी तो नहीं की, लेकिन दुनिया को यह जरूर याद दिलाया कि नागरिकों और बच्चों को निशाना बनाने का क्रूर इतिहास ईरान की सरकार का रहा है, अमेरिका का नहीं। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने भी जांच चलने का हवाला देते हुए फिलहाल इस मामले पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे इस घटना को लेकर सस्पेंस और भी ज्यादा गहरा गया है।
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