इजरायल ,06 मार्च । इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पूरी दुनिया में सियासी हलचल तेज हो गई है। देश के भीतर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर इस अंतरराष्ट्रीय युद्ध को लेकर चुप्पी साधने के आरोप लगा रहा था। इसी भारी राजनीतिक घमासान के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। भारत ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता को गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दोनों देशों के मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखने का कड़ा संदेश दिया है।
ईरानी दूतावास पहुंचे विदेश सचिव, शोक पुस्तिका में लिखा संदेश
गुरुवार को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे। उन्होंने वहां जाकर ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की और आधिकारिक शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर एक बेहद भयानक और बड़े पैमाने पर हमला किया था, जिसमें आयतुल्लाह अली खामेनेई की जान चली गई थी। इस बड़ी घटना के बाद से ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है और वहां भारी राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। इस बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल में भारत ने अपना संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
तेल और व्यापार के मामले में अमेरिका के दबाव में फंसी सरकार?
इस अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच देश की घरेलू राजनीति भी पूरी तरह से गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को देश के लिए एक बेहद खतरनाक संकेत बताया है। उनका गंभीर आरोप है कि अमेरिका पिछले कई महीनों से इस विनाशकारी युद्ध की तैयारी कर रहा था और उसे अच्छी तरह पता था कि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके बावजूद, अमेरिका ने व्यापार समझौते की आड़ में भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदने से मना लिया। सिसोदिया ने सीधा सवाल दागा है कि क्या अमेरिका ने हमारे प्रधानमंत्री को गुमराह किया है, या फिर खुद प्रधानमंत्री ने अमेरिका को खुश करने के चक्कर में भारत के आर्थिक और राष्ट्रीय हितों के साथ इतना बड़ा समझौता कर लिया है।
मेहमान जहाज डुबाने पर खडग़े ने उठाए कड़े सवाल
दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी सरकार की विदेश नीति पर सीधा और तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने हिंद महासागर में अमेरिकी हमले का शिकार हुए ईरानी जहाज के डूबने की घटना पर सरकार की खामोशी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए खडग़े ने बताया कि अमेरिकी टारपीडो की चपेट में आकर डूबने वाला ईरानी नौसेना का जहाज ‘ईरिस डेनाÓ बिना किसी सैन्य साजो-सामान के था। उन्होंने कहा कि यह जहाज कोई घुसपैठिया नहीं, बल्कि भारत का एक आमंत्रित अतिथि था, जो विशाखापत्तनम में 15 से 26 फरवरी तक आयोजित हुए ‘अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026Ó में हिस्सा लेकर शांतिपूर्वक वापस लौट रहा था। विपक्ष का आरोप है कि अपने ही मेहमान जहाज पर हुए इस हमले पर चुप्पी साधकर सरकार देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय सम्मान की घोर उपेक्षा कर रही है।
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