कोरबा, 07 मार्च (आरएनएस)। सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं तो खरमास लगता है और इसके साथ ही शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। साल 2026 में मार्च महीने में लगने वाला खरमास 15 मार्च से शुरू होगा और 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा। इस दौरान धार्मिक कार्य और भगवान की पूजा-उपासना को विशेष महत्व दिया जाता है।
पंचांग के अनुसार मीन संक्रांति 15 मार्च 2026, रविवार को होगी, जिसके साथ ही खरमास की शुरुआत मानी जाएगी। इस दिन का पुण्यकाल सुबह 06.31 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक रहेगा, जबकि महापुण्यकाल सुबह 06.31 से 08.31 बजे तक माना गया है। इसके बाद से लगभग एक महीने तक किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है। यही कारण है कि एक साल में दो बार खरमास आता है। आमतौर पर यह अवधि मार्च-अप्रैल और नवंबर-दिसंबर के बीच पड़ती है। इस समय विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या नए काम की शुरुआत जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। हालांकि इस अवधि को भगवान विष्णु और सूर्य देव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। खरमास के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय कोई भी नया शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। साथ ही धन के लेन-देन में सावधानी बरतनी चाहिए और विवादों से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दौरान मांस-मदिरा जैसी तामसिक चीजों का सेवन भी नहीं करना चाहिए।धार्मिक दृष्टि से यह समय साधना और दान-पुण्य के लिए बहुत शुभ माना गया है। इस अवधि में लक्ष्मी-नारायण और सूर्य देव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। संभव हो तो व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए और सूर्य देव को अघ्र्य देना चाहिए। इसके अलावा आदित्य हृदय स्तोत्र और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि खरमास के दौरान जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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