भोपाल 8 मार्च (आरएनएस)। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर सोमवार से हड़ताल पर जा सकते हैं। लंबित स्टाइपेंड संशोधन लागू नहीं होने के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने रविवार को प्रदेशभर के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में ‘जस्टिस मार्चÓ निकाला।
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो सोमवार से ओपीडी सेवाएं नहीं देंगे। ऑपरेशन थिएटर में भी केवल अति गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। इससे हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ सकता है।
विरोध के अगले चरण में रविवार को प्रदेश के विभिन्न शासकीय मेडिकल कॉलेज परिसरों में ‘जस्टिस मार्चÓ रैली निकाली गई। राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में दोपहर करीब 12 बजे सभी रेजिडेंट डॉक्टर एडमिन ब्लॉक पर एकत्र हुए। इसके बाद पूरे कैंपस और आसपास के इलाकों में रैली निकालकर नारेबाजी की गई। डॉक्टरों ने कहा कि यह मार्च शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया और सरकार से जल्द मांगें पूरी करने का अनुरोध किया गया है, ताकि आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत न पड़े।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न पिछले तीन दिनों से शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं। डॉक्टर काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करना है।
जूनियर डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो सोमवार से प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि उनका आंदोलन केवल शासन के पहले से जारी आदेश के क्रियान्वयन और लंबित एरियर के भुगतान की मांग को लेकर है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सरकार जल्द निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर विरोध को और तेज किया जाएगा।

