लखनऊ 10 मार्च (आरएनएस ) संपत्ति के फर्जी या विवादित सौदों पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार रजिस्ट्री प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी कर रही है। स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, अब संपत्ति के पंजीकरण से पहले खतौनी और अन्य स्वामित्व से संबंधित अभिलेखों का अवलोकन और परीक्षण अनिवार्य करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।विभाग के अनुसार वर्तमान समय में कई मामलों में संपत्ति के वास्तविक स्वामी के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा संपत्ति का विक्रय, प्रतिबंधित या निषिद्ध संपत्ति की बिक्री, किसी व्यक्ति द्वारा अपने अधिकार से अधिक संपत्ति का विक्रय, कुर्क संपत्ति का विक्रय या केंद्र एवं राज्य सरकार के स्वामित्व वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री कराए जाने जैसे मामले सामने आते रहते हैं। इससे जनसामान्य को मुकदमेबाजी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है तथा शासन और विभाग की छवि भी प्रभावित होती है।रजिस्ट्रीकरण अधिनियम और नियमावली के तहत किसी विलेख के पंजीकरण से इनकार करने के मामले में उप निबंधक को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 35 के अंतर्गत सीमित अधिकार प्राप्त हैं। इसी कारण कई बार विवादित या संदिग्ध संपत्तियों की भी रजिस्ट्री हो जाती है।इन समस्याओं के समाधान के लिए अन्य राज्यों में समय-समय पर रजिस्ट्रीकरण अधिनियम और नियमावली में संशोधन कर नियंत्रण स्थापित किया गया है। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।प्रस्ताव के अनुसार रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में धारा 22 और 35 के बाद नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ी जाएंगी। धारा 22-ए के तहत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा। धारा 22-बी के माध्यम से पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान से संबंधित प्रावधान किए जाएंगे। वहीं धारा 35-ए(1) के अनुसार धारा 17(1) के अंतर्गत आने वाली अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जे या अंतरण से जुड़े वे दस्तावेज अनिवार्य होंगे जिन्हें राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से निर्दिष्ट करेगी। यदि ऐसे दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे तो पंजीकरण अधिकारी संबंधित विलेख के पंजीकरण से इनकार कर सकेगा।विभाग का कहना है कि इस प्रस्ताव को लागू किए जाने से जनसामान्य को अनावश्यक न्यायिक विवादों और अन्य असुविधाओं से राहत मिलेगी। यह संशोधन भारतीय संविधान की अनुसूची-7 की तृतीय सूची (समवर्ती सूची) की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत प्रस्तावित किया गया है।प्रमुख सचिव स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अमित गुप्ता के अनुसार प्रस्तावित संशोधन से संबंधित विधेयक को पहले मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा और इसके बाद विधानमंडल की मंजूरी प्राप्त की जाएगी। इससे संपत्ति के लेनदेन में पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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