सीतापुर 10 मार्च (आरएनएस)। ज्योतिषमठ बद्रिकाश्रम पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध यात्रा मंगलवार सुबह नैमिषारण्य से आगे बढ़ते हुए मिश्रिख के दधीचि कुंड पहुंची। यहां तीर्थ पुरोहित राहुल शर्मा ने विधिवत पूजन-अर्चन कराया। इसके बाद शंकराचार्य अपने काफिले के साथ सिधौली के लिए रवाना हो गए। इससे पहले मंगलवार सुबह नैमिषारण्य के जगन्नाथ मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद शंकराचार्य ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौ माता की रक्षा के लिए समाज को जागरूक करना है। उनका कहना था कि अब जनता स्पष्ट रूप से समझ चुकी है कि गौ माता की हत्या स्वीकार नहीं की जा सकती और इसके विरोध में लोग आगे आ रहे हैं। अन्य संतों के समर्थन के सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उन्होंने किसी से इस संबंध में बातचीत नहीं की है। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से पता है कि कई संत भय के माहौल में हैं, इसलिए वे उन्हें किसी प्रकार की अतिरिक्त परेशानी में नहीं डालना चाहते। आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा यात्रा रोकने की मांग के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि ब्रह्मचारी पहले गौ तस्करी के मामले में पकड़े जा चुके हैं और जेल भी जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग गौ तस्करों के साथ खड़े हैं, वे गौ रक्षा के लिए निकली यात्रा का विरोध करेंगे ही।
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सोमवार देर शाम पहुंची थी यात्रा
इससे पहले सोमवार देर शाम शंकराचार्य की यात्रा उन्नाव और हरदोई की सीमाओं से होते हुए पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य पहुंची थी। यहां वेदव्यास आश्रम के प्रतिनिधि रंजीत शास्त्री ने उनका स्वागत किया। इसके बाद शंकराचार्य ने ललिता देवी मंदिर में दर्शन-पूजन किया और चक्र तीर्थ की अष्टकोणीय आरती में भाग लिया। परमार्थ धाम आश्रम में भक्तों द्वारा उनका पादुका पूजन किया गया। सूर्यास्त के बाद मौन रहने की परंपरा के कारण उन्होंने उस समय मीडिया से बातचीत नहीं की थी। शंकराचार्य के आगमन पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने नैमिषारण्य के जगन्नाथ मंदिर में उनके दर्शन किए।
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सिधौली में शंकराचार्य की जनसभा
– बोले डरे हुए हैं संत, गोमाता को मिले राष्ट्रमाता का दर्जा
सीतापुर(आरएनएस)। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को सिधौली में आयोजित जनसभा में गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि गाय को सरकारी अभिलेखों में पशु के रूप में दर्ज करने के बजाय उसे माता के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। शंकराचार्य नैमिषारण्य से सिधौली पहुंचकर सबसे पहले कस्बे के सिद्धेश्वर महादेव धाम में शिव दर्शन किए। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। मंचासीन होने के बाद उन्होंने कहा कि गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए सनातन समाज को एकजुट करने की कवायद शुरू की गई है और इसी उद्देश्य से यह यात्रा निकाली जा रही है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य में उन्होंने किसी संत से कोई बातचीत नहीं की। उनका कहना था कि उन्हें पहले से पता है कि कई संत भय के माहौल में हैं, इसलिए वे उन्हें किसी तरह की समस्या में नहीं डालना चाहते। शंकराचार्य ने लोगों से बुधवार को लखनऊ में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भी शामिल होने का आह्वान किया। इस दौरान उनके सहयोगी जगदीशानन्द महाराज ने यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आयोजन में प्रशांत तिवारी और आचार्य मनीष पांडेय सहित कई लोग मौजूद रहे। नैमिषारण्य से सिधौली आते समय मिश्रिख, कल्ली चौराहा, संदना और अलादादपुर तिराहे पर श्रद्धालुओं ने माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया। सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के बाद शंकराचार्य लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
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