लखनऊ, 11 मार्च (आरएनएस ) । बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार को नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक कॉन्स्टैन्टिन सेर्गेयेविच नोवोसेलोव ने विशेष व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने की। इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के रजत श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन समिति की ओर से मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत के साथ हुई, जबकि मंच संचालन प्रो. शूरा दारापुरी ने किया।कॉन्स्टैन्टिन सेर्गेयेविच नोवोसेलोव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह केंद्रित रहना चाहिए और निरंतर आगे बढऩे का संकल्प बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति सकारात्मक भावना के साथ कार्य करता है तो वह निश्चित रूप से सफलता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आत्मविश्वास, परिश्रम और लगातार सीखने की इच्छा ही किसी भी क्षेत्र में आगे बढऩे की सबसे बड़ी शक्ति होती है।उन्होंने कहा कि भौतिकी के क्षेत्र में जहां कई चुनौतियाँ हैं, वहीं असीम संभावनाएँ भी मौजूद हैं। हर नई पीढ़ी अपने अनुभव, शोध और नवाचारों के माध्यम से आने वाली पीढिय़ों के लिए नए ज्ञान और खोजों की विरासत छोड़कर जाती है। इसलिए विद्यार्थियों को जिज्ञासा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ते हुए नए विचारों और आविष्कारों की दिशा में लगातार प्रयास करना चाहिए।कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने नोवोसेलोव का विश्वविद्यालय आने और विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका विश्वविद्यालय आगमन पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गौरव, सम्मान और प्रेरणा का विषय है। उनके प्रेरणादायक विचारों, अनुभवों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने विद्यार्थियों को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी उनके विचारों और सीख को अपने जीवन में आत्मसात कर अपने लक्ष्य की प्राप्ति और भविष्य निर्माण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।कॉन्स्टैन्टिन सेर्गेयेविच नोवोसेलोव को वर्ष 2010 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह सम्मान ग्रैफीन नामक अत्यंत पतले और मजबूत पदार्थ की खोज तथा उस पर किए गए महत्वपूर्ण प्रयोगों के लिए दिया गया। ग्रैफीन कार्बन का ऐसा रूप है जो केवल एक परमाणु की मोटाई जितना पतला होता है, लेकिन अत्यंत मजबूत होने के साथ-साथ बिजली का उत्कृष्ट चालक भी है। उनकी इस खोज ने नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में नए अनुसंधानों और संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।कार्यक्रम के अंत में डॉ. देवेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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