लखनऊ/नई दिल्ली, 11 मार्च (आरएनएस )। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में ग्रामीण विकास के मुद्दे पर बोलते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब भारत सरकार विकसित भारत की बात करती है तो देश को यह जानने का अधिकार है कि उस कल्पना में गांवों को किस स्थान पर रखा गया है। उनका कहना था कि वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में ग्रामीण विकास के लिए केवल 3.6 प्रतिशत राशि निर्धारित की गई है, जिससे सरकार की ग्रामीण भारत के प्रति सोच स्पष्ट होती है।संजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ग्रामीण विकास की कई योजनाओं का दावा करती है, जिनमें सबसे अधिक प्रचारित जल जीवन मिशन – हर घर जल योजना है, लेकिन इसकी जमीनी स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों में पाइप से पानी पहुंचाने के नाम पर घरों में मीटर लगाकर लोगों से पैसे की वसूली की जा रही है। साथ ही इस योजना के तहत गांवों में पहले से बनी सड़कों को बड़े पैमाने पर खोदकर खराब कर दिया गया है, जबकि ये सड़कें जिला पंचायत के ग्रामीण विकास फंड से बनाई गई थीं। उन्होंने कहा कि जिस धन से गांवों का विकास हुआ था, उसी को नष्ट कर रास्तों को खराब कर दिया गया है और यह योजना जल जीवन मिशन नहीं बल्कि जनजीवन को अस्त-व्यस्त करने वाली योजना बन गई है।उन्होंने कहा कि इस योजना में भ्रष्टाचार के आरोप अब केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि भाजपा के भीतर से भी उठ रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा के विधायक बृजेश राजपूत ने उत्तर प्रदेश सरकार के एक मंत्री का घेराव कर आरोप लगाया था कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में बनाई गई पानी की टंकियां लगने से पहले ही उखड़ जाती हैं, फट जाती हैं और ढह जाती हैं। संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी इस मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन सरकार ने ध्यान देने के बजाय उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए। उनका कहना था कि जब सरकार के अपने विधायक ही भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं तो यह स्पष्ट है कि यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
संजय सिंह ने मनरेगा योजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद से किसी भी वर्ष औसतन 50 दिनों से अधिक रोजगार नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश कर रही है। उनका कहना था कि सरकार के ही आंकड़ों के अनुसार 125 दिनों की रोजगार गारंटी के लिए लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है, जबकि सरकार ने इसके लिए केवल 88 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार की मंशा इस योजना को प्रभावी ढंग से चलाने की नहीं है।उन्होंने उज्ज्वला योजना और गैस संकट का मुद्दा भी उठाया। संजय सिंह ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत गांवों में लगभग 8 से 10 करोड़ गैस सिलेंडर वितरित किए गए और लगभग 10 से 11 करोड़ लोगों ने स्वयं गैस कनेक्शन लिया, यानी देश के गांवों में करीब 21 करोड़ गैस कनेक्शन मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मध्य एशिया में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल के पक्ष में क्यों खड़े हो गए, जिसके कारण आज भारत को गैस संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से होटल बंद होने की खबरें आ रही हैं और गुजरात के मोरबी में टाइल फैक्ट्रियां तक बंद हो गई हैं।संजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार न तो राज्यों के साथ न्याय कर रही है और न ही ग्रामीण व्यवस्था के साथ। उन्होंने कहा कि वाराणसी में किसानों की लगभग 4200 एकड़ जमीन जबरन अधिग्रहित की गई और वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब, जो देश के पीडीएस सिस्टम की रीढ़ है और जहां के किसानों की लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी है, उस राज्य के ग्रामीण विकास के 8000 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने रोक लिए हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार पंजाब और उसके किसानों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है। संजय सिंह ने कहा कि पंजाब में आई बाढ़ के दौरान केंद्र सरकार ने 1600 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक किसानों को उसका लाभ नहीं मिला है।संजय सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार की गलत और अव्यवस्थित नीतियों का खामियाजा राज्यों की सरकारों और ग्रामीण भारत को भुगतना पड़ रहा है। उनका आरोप था कि ग्रामीण विकास के नाम पर भाजपा सरकार देश की जनता को लगातार गुमराह कर रही है और वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही है।
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