जगत तारन गल्र्स डिग्री कॉलेज, में ‘सांस्कृतिक नारीवादी ग्रंथों के रूप में कुछ लोक गीतों का विश्लेषणÓ विषय विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन
प्रयागराज 11 मार्च (आरएनएस)। जगत तारन गल्र्स डिग्री कॉलेज, प्रयागराज में आज ‘सांस्कृतिक नारीवादी ग्रंथों के रूप में कुछ लोक गीतों का विश्लेषणÓ विषय पर जगत तारन गल्र्स डिग्री कॉलेज के महिला प्रकोष्ठ, राजभाषा समिति एवं अंग्रेजी विभाग के संयुक्त तत्वाधान में विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आरंभ प्रो. रतन कुमारी वर्मा, प्रभारी राजभाषा समिति ने स्वागत वक्तव्य से किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो. स्मिता अग्रवाल (महिला अध्ययन केंद्र की पूर्व निदेशक, अंग्रेजी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय) ने छात्राओं को लोक गीत के शब्दों का आधुनिक संगीत में प्रयोग को सुमधुर गायन के माध्यम उदाहरण सहित बताया। कजरी, चैता आदि लोक गीत कभी भी समाज से कटा नहीं आज भी गिरमिटिया समूह के लोक गीत समाज का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने श्रोताओं की जिज्ञासा को भी अपने तार्किक उत्तर से शांत किया। इस अवसर पर प्रोफेसर निलीमा मिश्रा, डॉ नम्रता देव, डॉ अजिता ओझा, डॉ प्रमा द्विवेदी, डॉ माधुरी राठौर, डॉ अंजलि शिवहरे, डॉ शारदा पाठक तथा बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ स्नेहा सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ फातिमा नूरी, प्रभारी, महिला प्रकोष्ठ, जगत तारन गल्र्स डिग्री कॉलेज ने किया।
इस अवसर पर मोनो एक्टिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रथम पुरस्कार शुभी तिवारी, द्वितीय पुरस्कार तृप्ति सिंह तथा शांभवी शुक्ला ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। साथ ही अन्तर महाविद्यालय कहानी लेखन में प्रथम पुरस्कार परी साहू (आर्य कन्या डिग्री कॉलेज), द्वितीय पुरस्कार शुभी तिवारी (जगत तारन गल्र्स डिग्री कॉलेज) और तृतीय पुरस्कार आयुषी पाठक (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) ने पुरस्कार प्राप्त किया।
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