हिन्दुस्तानी एकेडेमी में आज ‘भारतीय ज्ञान परम्परा और लोक साहित्यÓ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
प्रयागराज 11 मार्च (आरएनएस)। हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ0प्र0, प्रयागराज के तत्वावधान में आज ‘भारतीय ज्ञान परम्परा और लोक साहित्यÓ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दो सत्रों में किया गया। सर्वप्रथम एकेडेमी परिसर में स्थापित पं. बालकृष्ण भट्ट, राजर्षि पुरूषोत्तम दास टण्डन एवं सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र के प्रारम्भ में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए पायल सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा जो कि ऋषियों मुनियों के द्वारा वेदों उपनिषदों के माध्यम से लोक साहित्य, जीवन दर्शन और नैतिक शिक्षा के पथ प्रदर्शक हैं, जो कि भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के द्वारा लोक साहित्य को समृद्ध करते हैं। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. आर.पी. सिंह, पूर्व निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, उ.,प्र. ने कहा कि आदि काल से ऋषियों, मुनियों एवम् मनीषाण ने अपने ज्ञान, तपस्या एवम साधनाओं से अर्जित ज्ञान का वेदों, पुराणों और उपनिषदों के द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तान्तरण हेतु साहित्य एवं लोक कथाओं के द्वारा जन सामान्य के अनुकरण हेतु सुलभ कराया है। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. अजय प्रकाश खरे, प्राचार्य, सीएमपी डिग्री कॉलेज, प्रयागराज नेे अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और लोक साहित्य दोनों पृथक नहीं है। लोक साहित्य के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा जन जन तक पहुंचती है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ0 सत्यप्रिय पाण्डेय, श्याम लाल महाविद्यालय, दिल्ली और विशिष्ट वक्ता डॉ0 कल्पना वर्मा, पूर्व आचार्य, आर्यकन्या डिग्री कॉलेज, प्रयागराज ने किया।
इस सत्र का संचालन डॉ0 सुजीत कुमार सिंह, इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
राष्ट्रीय सुंगोष्ठी के द्वितीय सत्र के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान एकेडेमी के प्रशासनिक अधिकारी रतन पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों में प्रो. रामकिशोर शर्मा, रामनरेश तिवारी ‘पिण्डीवासाÓ, डॉ. पवन कुमार सिंह, डॉ. सजंय कुमार सिंह, सहित शोधार्थी एवं शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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