-न्याय न मिलने पर गोंड सेना करेगी आंदोलन, सौंपा ज्ञापन
अयोध्या 11 मार्च (आरएनएस)। गरीब और असहाय गोंड समाज की महिला को उसकी 20 वर्ष पुरानी काबिज जमीन से बेदखल करने और मकान निर्माण में बाधा डालने का एक गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन की टालमटोल की नीति और दबंगों के हौसले के खिलाफ गोंड सेना ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। संगठन ने जिलाधिकारी को एक विधिक प्रतिवेदन और Óपूर्व सूचना पत्र सौंपकर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पीडि़त महिला को न्याय नहीं मिला, तो संपूर्ण जिले में एक वृहद जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। मामला परसवा कला का है, जहाँ एक आदिवासी महिला रेनु देवी पत्नी हरीलाल गॉड पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से अपनी भूमि पर काबिज है। हाल ही में जब उसने अपने जर्जर मकान की जगह नया निर्माण शुरू किया, तो गांव के एक दबंग देशराज सिंह पुत्र सहदेव सिंह, प्रमोद सिंह पुत्र देशराज सिंह व अन्य ने बाहुबल के दम पर काम रुकवा दिया। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि स्थानीय लेखपाल और पुलिस की संयुक्त आख्या (रिपोर्ट) में भी महिला के 20 वर्षीय निर्विवाद कब्जे की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन के कुछ अधिकारी दबंगों के दबाव में कार्रवाई करने के बजाय पीडि़त महिला को ही दीवानी न्यायालय जाने की सलाह दे रहे हैं। इस अन्याय पर सख्त नाराजगी जताते हुए गोंड सेना के राष्ट्रीय संयोजक, प्रीतम सिंह गोंड ने स्पष्ट किया है कि गोंड समाज के किसी भी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन का यह रवैया सर्वोच्च न्यायालय के स्थिर आधिपत्यÓ के आदेशों और एससी/एसटी एक्ट का सीधा उल्लंघन है। जब राजस्व विभाग स्वयं कब्जे की पुष्टि कर रहा है, तो प्रशासन का कर्तव्य महिला को सुरक्षा देना है, न कि उसे दर-दर भटकने के लिए छोड़ देना। गोंड सेना के जिलाध्यक्ष, गरुण कुमार गोंड ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की है कि पीडि़त महिला के मकान का निर्माण कार्य तत्काल पुलिस सुरक्षा में संपन्न कराया जाए। निर्माण में बाधा डालने और डराने धमकाने वाले दबंगों पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और नई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत तत्काल एफ़आईआर दर्ज की जाए। शांतिभंग की आशंका के चलते विरोधियों को भारी मुचलके पर पाबंद किया जाए। संगठन ने जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र को एक Óपूर्व सूचना पत्रÓ घोषित किया है। यदि इस शोषित महिला को न्याय मिलने में तनिक भी विलंब हुआ, तो गोंड सेना पूरे जिले की सड़कों पर उतरेगी। इसके बाद उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की किसी भी स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। वही मामले की गंभीरता को देखते हुए संगठन ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली से भी हस्तक्षेप की मांग की है।
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