वॉशिंगटन ,12 मार्च । वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने हितों की रक्षा के लिए नई व्यापारिक रणनीति की घोषणा की है। इसके तहत अमेरिकी सरकार ने भारत, चीन और यूरोपीय संघ समेत 16 प्रमुख देशों के खिलाफ ‘सेक्शन 301Ó के तहत व्यापक व्यापारिक जांच शुरू कर दी है।
दरअसल, बीते महीने 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल कानून के तहत लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार देकर रद्द कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने ‘ट्रेड एक्ट 1974Ó के सेक्शन 122 का इस्तेमाल करते हुए 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लागू कर दिया।
अब अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने कहा है कि ‘सेक्शन 301Ó के तहत शुरू की गई नई जांच प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाएगा। प्रशासन की कोशिश है कि जुलाई में अस्थायी टैरिफ की अवधि समाप्त होने से पहले जांच पूरी कर ली जाए। इस प्रक्रिया के तहत 15 अप्रैल तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं, जबकि 5 मई के आसपास सुनवाई प्रस्तावित है।
अमेरिका का आरोप है कि ये 16 देश अपनी घरेलू उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र को भारी सब्सिडी देकर अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। साथ ही अत्यधिक उत्पादन कर सस्ते दामों पर अमेरिकी बाजार में उत्पाद बेच रहे हैं, जिससे वहां की स्थानीय कंपनियों को नुकसान हो रहा है।
जांच के दौरान सरकारी सब्सिडी, कम मजदूरी दर, राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों की गतिविधियां और मुद्रा नीतियों जैसे पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी। इस जांच के दायरे में भारत और चीन के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार कनाडा को इस सूची से बाहर रखा गया है।
इसी बीच अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के लिए एक अलग ‘सेक्शन 301Ó जांच शुरू करने का भी ऐलान किया है। इसके दायरे में 60 से अधिक देश आ सकते हैं। अमेरिका पहले ही चीन के शिनजियांग प्रांत से आने वाले सोलर पैनल समेत कई उत्पादों पर प्रतिबंध लगा चुका है। वाशिंगटन का आरोप है कि चीन ने शिनजियांग में उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए लेबर कैंप बना रखे हैं, हालांकि बीजिंग इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।
इस कदम का सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। अगर जांच में भारत की व्यापारिक नीतियां अमेरिकी मानकों के अनुसार अनुचित पाई जाती हैं, तो 2026 की गर्मियों तक भारतीय उत्पादों पर नए और भारी टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे और देश के निर्यात तथा विनिर्माण क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।
इस बीच कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के नेतृत्व में अमेरिकी अधिकारी इस सप्ताह पेरिस में चीनी अधिकारियों से मुलाकात करने वाले हैं। यह बैठक इसी महीने बीजिंग में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात से पहले हो रही है।
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